August 15, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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जल संरक्षण से सशक्त होगा ग्रामीण भविष्य, गढ़मिरी में विधायक चैतराम अटामी के नेतृत्व में हुआ सामूहिक श्रमदान नालों पर बने छोटे बांध, जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में ऐतिहासिक पहल

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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा राहुल ****//** दंतेवाड़ा * जल संरक्षण और आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में एक सराहनीय कदम उठाते हुए ग्राम पंचायत गढ़मिरी, विकासखंड कुआकोंडा में आज 09 जनवरी 2026 को एक अभिनव सामूहिक श्रमदान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विधायक श्री चैतराम अटामी के नेतृत्व में संपन्न हुआ, जिसमें जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में ग्रामवासियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।

 

 

कार्यक्रम के अंतर्गत गांव से होकर बहने वाले नाले में अस्थायी छोटे-छोटे बांधों (चेक डैम) का निर्माण किया गया। इन बांधों का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल एवं अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों से उपलब्ध पानी का संग्रहण एवं संरक्षण करना है, जिससे गर्मी के मौसम में भी किसानों को सिंचाई हेतु पर्याप्त जल उपलब्ध हो सके। इस पहल से न केवल जल स्तर में सुधार होगा, बल्कि कृषि उत्पादन में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।
जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा स्वयं श्रमदान कर जल संरक्षण का संदेश देने से ग्रामीणों में इस विषय को लेकर विशेष जागरूकता देखी गई। ग्रामीणों का कहना है कि इस पहल से सब्जी उत्पादन एवं अन्य फसलों की खेती को बढ़ावा मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और गांव की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।
‘जल ही जीवन है’ – विधायक चैतराम अटामी
इस अवसर पर विधायक चैतराम अटामी ने कहा कि “जल ही जीवन है और यदि हम जल का सही समय पर संरक्षण करें, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जा सकता है।” उन्होंने किसानों से जैविक खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि रसायन मुक्त खेती से न केवल मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, बल्कि स्वास्थ्यवर्धक एवं गुणवत्तापूर्ण फसलें भी प्राप्त होती हैं।

 

 

 

जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों की रही सक्रिय सहभागिता
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष नन्दलाल मुड़ामी, सुमित भदौरिया, कुआकोंडा जनपद पंचायत अध्यक्ष सुकालू मुड़ामी, दंतेवाड़ा जनपद पंचायत उपाध्यक्ष रमेश गावड़े, जिला एसटी मोर्चा महामंत्री सोमंडू कोर्राम, ग्राम पंचायत सरपंच पवन कोर्राम सहित अनेक जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।
सभी ने एक स्वर में इस पहल की सराहना करते हुए इसे जल संरक्षण, जैविक खेती और ग्रामीण विकास की दिशा में अनुकरणीय प्रयास बताया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया गया कि सामूहिक सहभागिता और श्रमदान से ही जल संकट का स्थायी समाधान संभव है।

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