फोगला आश्रम, वृंदावन धाम में श्रीमद्भागवत कथा का भावविभोर शुभारंभ — दिव्य पोथी (ग्रंथ) पूजन और भव्य कलश यात्रा ने रचा भक्ति का अलौकिक दृश्य






त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//***// वृंदावन धाम।
श्रीकृष्ण की पावन लीलाभूमि वृंदावन धाम आज एक बार फिर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठी, जब फोगला आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा का अत्यंत भावपूर्ण एवं भव्य शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिन ही ऐसे दिव्य दृश्य साकार हुए, जिन्हें देखकर प्रत्येक श्रद्धालु का मन भाव-विभोर हो उठा और हृदय स्वतः ही श्रीहरि की भक्ति में लीन हो गया।

कथा आयोजन का शुभारंभ प्रातःकाल पोथी (ग्रंथ) पूजन से हुआ। सुबह लगभग 9:00 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जैसे ही श्रीमद्भागवत महापुराण का विधिवत पूजन आरंभ हुआ, पूरा आश्रम परिसर दिव्यता से भर उठा। सजी हुई वेदी, धूप–दीप की सुगंध, शंखध्वनि और मंत्रों की गूंज ने वातावरण को अत्यंत पावन बना दिया। भावपूर्ण तस्वीरों में यह स्पष्ट झलक रहा था कि यह केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और आस्था का जीवंत स्वरूप था।
श्रद्धालुओं की आंखों में आस्था, हाथों में पुष्प और मन में श्रीकृष्ण का नाम—हर दृश्य आत्मा को स्पर्श कर रहा था। पोथी (ग्रंथ) पूजन मानो श्रीमद्भागवत कथा के सफल आयोजन हेतु भगवान से आशीर्वाद प्राप्त करने का दिव्य माध्यम बन गया। यह पूजन अनुष्ठान सुबह 10:00 बजे तक संपन्न हुआ, जिसमें कथा की सफलता, लोककल्याण एवं विश्व शांति की मंगलकामना की गई।


इसके पश्चात सुबह 11:00 बजे भव्य कलश यात्रा का शुभारंभ हुआ, जिसने पूरे वृंदावन को भक्ति के रंग में रंग दिया। फोगला आश्रम से निकली यह कलश यात्रा अपने आप में एक अलौकिक दृश्य प्रस्तुत कर रही थी। सिर पर कलश धारण किए श्रद्धालु महिलाएं, पारंपरिक वेशभूषा, मुख पर श्रद्धा की मुस्कान और होंठों पर “राधे-राधे” एवं “जय श्रीकृष्ण” का मधुर जाप—हर पल मन को आनंद से भर रहा था।


कलश यात्रा के भावपूर्ण चित्र इस बात के साक्षी बने कि यह यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जन-जन की आस्था का सजीव उत्सव थी। ढोल, मंजीरे और भजन-कीर्तन के साथ जब यात्रा आगे बढ़ी, तो पूरा मार्ग भक्तिरस में सराबोर हो गया। श्रद्धालु नृत्य करते, भजन गाते और प्रभु की महिमा का गुणगान करते हुए आगे बढ़ते रहे।
यह भव्य कलश यात्रा फोगला आश्रम से निकलकर श्री बांके बिहारी मंदिर के समीप से होते हुए निकाली गई। मंदिर क्षेत्र में पहुंचते ही श्रद्धालुओं ने श्री बांके बिहारी जी के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य माना। वहां उपस्थित भक्तों द्वारा पुष्पवर्षा कर कलश यात्रा का स्वागत किया गया, जिससे दृश्य और भी मनोहारी बन गया। इसके पश्चात यात्रा पुनः आश्रम लौटकर विधिवत रूप से संपन्न हुई।
कलश यात्रा के साथ ही श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत आरंभ हो गया। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं का अपार उत्साह और भक्ति का सैलाब देखने को मिला। आगामी दिनों में कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का रसपूर्ण वर्णन श्रद्धालुओं के जीवन में नई ऊर्जा, शांति और भक्ति का संचार करेगा—ऐसी मान्यता है।
फोगला आश्रम में आज का यह दिव्य दृश्य यह संदेश दे गया कि वृंदावन केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि भक्ति का जीवंत स्वरूप है—जहां हर पूजा, हर यात्रा और हर कथा स्वयं श्रीकृष्ण की कृपा से सजीव हो उठती है।
श्रीधाम वृंदावन में आज से आरंभ हो रही 151वीं श्रीमद्भागवत कथा के पावन अवसर पर कथा व्यास जी, समस्त विप्रगण एवं सभी पोथी (ग्रंथ) यजमानों को कोटि-कोटि नमन।





