March 7, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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चैत्र माह में अपनाएं संयमित आहार-विहार, स्वस्थ रहने का यही है आयुर्वेदिक मंत्र – डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा

 

तैलीय और मसालेदार भोजन से रखें दूरी, हल्का और सुपाच्य भोजन रहेगा लाभकारी; चने का सेवन बताया हितकर

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//  कोरबा   हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह का शुभारंभ 4 मार्च 2026 से हो चुका है, जो 2 अप्रैल 2026 तक रहेगा। यह समय ऋतु परिवर्तन का होता है, जब वसंत ऋतु अपने अंतिम चरण में होती है और धीरे-धीरे ग्रीष्म ऋतु का आगमन होने लगता है। ऐसे समय में स्वास्थ्य को संतुलित बनाए रखने के लिए आहार-विहार पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होता है। छत्तीसगढ़ के ख्यातिलब्ध आयुर्वेद चिकित्सक एवं नाड़ी वैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने चैत्र माह में स्वस्थ रहने के लिए खान-पान और दिनचर्या से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए हैं।
डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया कि भारतीय परंपरा में ऋतुचर्या अर्थात ऋतुओं के अनुसार आहार-विहार अपनाने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। ऋतु के अनुरूप खान-पान और जीवनशैली अपनाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहती है और कई बीमारियों से बचाव संभव होता है। चैत्र माह में मौसम में तेजी से बदलाव होने लगता है, जिससे वातावरण गर्म और शुष्क हो जाता है। इस कारण शरीर में पानी की कमी, पाचन शक्ति में कमजोरी और सर्दी-खांसी जैसी समस्याओं की संभावना बढ़ जाती है।
उन्होंने बताया कि इस अवधि में तैलीय, मसालेदार, भारी और बासी भोजन से विशेष रूप से परहेज करना चाहिए। होटल या बाहर का भोजन भी कम से कम लेना चाहिए, क्योंकि ऐसे खाद्य पदार्थ पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। उन्होंने कहा कि गर्मी बढ़ने के कारण शरीर में डिहाइड्रेशन की समस्या भी बढ़ सकती है, इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद आवश्यक है।
डॉ. शर्मा ने बताया कि चैत्र माह में वातावरण की शुष्कता के कारण आंखों में सूखापन और जलन की समस्या भी देखने को मिलती है। इससे बचाव के लिए समय-समय पर आंखों को स्वच्छ पानी से धोना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सक की सलाह से गुलाब जल का उपयोग किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि इस समय हल्का, ताजा और आसानी से पचने वाला भोजन करना सबसे अधिक लाभकारी होता है। साथ ही बासी भोजन से पूरी तरह बचना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से बताया कि चैत्र माह में गुड़ का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह शरीर में कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां उत्पन्न कर सकता है। वहीं चने का सेवन स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत लाभकारी माना गया है।
क्या खाना चाहिए :
डॉ. शर्मा के अनुसार चैत्र माह में चना, जौ, ज्वार की खीर, चावल, मक्के की खीर और छिलके वाली मूंग दाल का सेवन करना लाभकारी रहता है। फलों में अमरूद, अनार, संतरा, सेब, अंगूर और नारियल जैसे मौसमी फल स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते हैं। सब्जियों में सहजन की फली, हरा धनिया, अदरक, पुदीना, करेला, ककड़ी और लौकी का सेवन करना चाहिए। मसालों में काली मिर्च, सूखा धनिया, मीठा नीम, अजवाइन, जीरा, मेथी और सौंफ उपयोगी माने जाते हैं।
क्या नहीं खाना चाहिए :
चैत्र माह में गुड़, नया गेहूं, बाजरा, मक्का, उड़द दाल, कुलथी दाल और राजमा से परहेज करना चाहिए। सब्जियों में गाजर, मूली, मटर, फूलगोभी, पत्ता गोभी, बैंगन, मेथी, सरसों का साग और अरबी का सेवन कम करना चाहिए। फलों में आम, आम का रस, पपीता और केला भी कम मात्रा में लेना चाहिए। इसके अलावा अत्यधिक तेल-मसाले वाले और देर से पचने वाले भारी भोजन से भी बचना चाहिए।
कैसी हो दिनचर्या :
डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया कि चैत्र माह में स्वस्थ रहने के लिए जीवनशैली का संतुलन भी बेहद जरूरी है। उन्होंने सलाह दी कि रात में जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठना चाहिए। नियमित रूप से योग, प्राणायाम और ध्यान करना चाहिए तथा शरीर की क्षमता के अनुसार हल्का व्यायाम करना लाभकारी होता है। हालांकि अत्यधिक श्रम करने से बचना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सुबह देर तक सोना, दिन में अधिक समय तक सोना, तैलीय और मसालेदार भोजन करना, रात्रि में जागरण करना और तामसिक आहार लेना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए इन आदतों से बचना चाहिए।
डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा के अनुसार यदि लोग ऋतु के अनुसार आहार-विहार अपनाएं और आयुर्वेद की परंपरागत जीवनशैली का पालन करें, तो वे अनेक मौसमी बीमारियों से बच सकते हैं और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

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