सर्दियों में पीला कफ और संक्रमण: जानिए इसके कारण, लक्षण और असरदार आयुर्वेदिक उपचार






त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/सर्दियों का मौसम शुरू होते ही वातावरण में नमी और ठंड बढ़ जाती है, जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) पर असर पड़ता है। ऐसे में सर्दी-जुकाम, खांसी, गले में खराश और कफ की समस्या आम हो जाती है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी उम्र के लोग इससे प्रभावित होते हैं। लेकिन जब कफ का रंग पीला या हरा हो जाए, तो यह एक साधारण सर्दी नहीं बल्कि संक्रमण का संकेत होता है।
🔶 पीले कफ का मतलब क्या है?
आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में जब वात, पित्त और कफ का संतुलन बिगड़ जाता है, तब विभिन्न प्रकार की बीमारियां उत्पन्न होती हैं।
पीला कफ यह दर्शाता है कि शरीर संक्रमण से लड़ रहा है। इसका अर्थ है कि शरीर में श्वेत रक्त कण (WBCs) किसी वायरस या बैक्टीरिया से लड़ने के लिए सक्रिय हैं। यही कारण है कि कफ का रंग पीला या हरा दिखाई देता है।
⚠️ पीले कफ के मुख्य कारण
बैक्टीरियल संक्रमण: जब बैक्टीरिया श्वसन तंत्र में प्रवेश कर जाते हैं।
वायरल सर्दी-जुकाम: यह कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो सकती है, पर ध्यान रखना जरूरी है।
साइनस इंफेक्शन: नाक और माथे के बीच जमा हुआ बलगम पीला हो सकता है।
धूम्रपान या प्रदूषण: फेफड़ों पर असर डालकर कफ की प्रकृति बदल देता है।
प्रतिरक्षा की कमी: कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में संक्रमण तेजी से बढ़ता है।
🩺 पीले कफ के साथ दिखने वाले लक्षण
लगातार खांसी और गले में खराश
नाक बंद होना या बहना
हल्का बुखार और सिरदर्द
शरीर में भारीपन और थकान
सांस लेने में तकलीफ
🌿 आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
आयुर्वेद कहता है कि सर्दी, खांसी और कफ “कफ दोष” की वृद्धि के कारण होते हैं। ठंडे, तैलीय और मीठे पदार्थ कफ को बढ़ाते हैं। इसलिए इस स्थिति में शरीर को संतुलित करने के लिए गर्म, हल्के और पाचक पदार्थों का सेवन जरूरी है।
💫 असरदार आयुर्वेदिक नुस्खे
तुलसी-अदरक-काली मिर्च काढ़ा:
पाँच तुलसी की पत्तियाँ, एक छोटा टुकड़ा अदरक, 4-5 काली मिर्च और थोड़ा सा गुड़ मिलाकर उबालें। सुबह-शाम इसका सेवन करें।
👉 यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर कफ को पतला करता है।
हल्दी दूध (गोल्डन मिल्क):
गुनगुने दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर रात को सोने से पहले पिएं।
👉 यह गले की सूजन कम करता है और संक्रमण से सुरक्षा देता है।
मुलेठी और पिपली चूर्ण:
समान मात्रा में मुलेठी और पिपली चूर्ण मिलाकर दिन में दो बार गर्म पानी के साथ लें।
👉 यह बलगम निकालने और फेफड़ों को साफ रखने में मददगार है।
भाप लेना (स्टीम थेरेपी):
गर्म पानी में कुछ बूंदें यूकेलिप्टस ऑयल या पुदीने के तेल की डालकर भाप लें।
👉 नाक की जकड़न और गले के संक्रमण में तुरंत राहत देता है।
गुनगुने नमक के पानी से गरारा:
दिन में दो बार गले की सफाई के लिए करें।
👉 गले के संक्रमण और बैक्टीरिया को खत्म करने में प्रभावी।
🚫 क्या न करें
ठंडा पानी, आइसक्रीम या कोल्ड ड्रिंक्स से परहेज करें।
देर रात तक जागना और पर्याप्त नींद न लेना शरीर की इम्युनिटी को कमजोर करता है।
धूम्रपान और प्रदूषण वाले स्थानों से बचें।
✅ क्या करें
रोजाना 1 से 2 लीटर गुनगुना पानी पिएं।
शरीर को गर्म रखें और नियमित रूप से योग व प्राणायाम करें।
आहार में सूप, अदरक, लहसुन और काली मिर्च जैसी चीजें शामिल करें।
🌸 निष्कर्ष
पीला कफ केवल एक सामान्य लक्षण नहीं, बल्कि शरीर का संकेत है कि अंदर संक्रमण बढ़ रहा है। ऐसे में सावधानी और आयुर्वेदिक उपचार के साथ-साथ जीवनशैली में सुधार बेहद आवश्यक है। प्राकृतिक नुस्खों का नियमित पालन करके आप सर्दियों में होने वाली खांसी, जुकाम और संक्रमण से सुरक्षित रह सकते हैं।





