छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव पर कोरबा कृषि की स्वर्णिम कहानी — परंपरागत खेती से आत्मनिर्भर कृषि की ओर 25 वर्षों की अद्भुत यात्रा



बीज, उर्वरक, फसल विविधीकरण और तकनीकी नवाचार से कोरबा बना आधुनिक कृषि मॉडल — किसानों की मेहनत और योजनाओं की सफलता ने रचा इतिहास
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/कोरबा // 24 अक्टूबर 2025
छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 गौरवशाली वर्षों का जश्न रजत महोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। इन 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ ने शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, ऊर्जा और ग्राम्य विकास के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में भी असाधारण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। कृषि विभाग कोरबा की यह रजत यात्रा किसानों की मेहनत, सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और वैज्ञानिक तकनीकों के सफल समन्वय की प्रेरक गाथा है।
वर्ष 2000 में जब छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ था, तब कृषि पारंपरिक स्वरूप में थी। लेकिन आज, वर्ष 2025 में कोरबा की कृषि आत्मनिर्भरता, नवाचार और आधुनिकता का प्रतीक बन चुकी है। यह केवल फसलों की हरियाली की कहानी नहीं, बल्कि किसानों के आत्मविश्वास और समृद्धि का प्रतीक बन चुकी है।

🌾 खेतों से समृद्धि तक — उत्पादन क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि
राज्य गठन के समय कोरबा जिले में खरीफ फसलों का कुल क्षेत्र 1,33,880 हेक्टेयर था, जो अब बढ़कर 1,37,066 हेक्टेयर तक पहुँच गया है। वहीं रबी फसलों का क्षेत्र 14,780 हेक्टेयर से बढ़कर 40,368 हेक्टेयर हो गया है।
फसल विविधीकरण की दिशा में यह बदलाव ऐतिहासिक है —
अनाज फसलें: 2,096 हेक्टेयर → 3,664 हेक्टेयर
दलहन फसलें: 4,535 हेक्टेयर → 7,581 हेक्टेयर
तिलहन फसलें: 6,068 हेक्टेयर → 9,608 हेक्टेयर
सब्जी उत्पादन: 2,081 हेक्टेयर → 19,515 हेक्टेयर
यह आँकड़े दर्शाते हैं कि किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर नकदी फसलों, सब्जी उत्पादन और जैविक खेती की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रहे हैं।
🌱 बीज वितरण में 14 गुना वृद्धि — गुणवत्तापूर्ण बीजों से बढ़ी उत्पादकता
कृषि विभाग कोरबा ने पिछले 25 वर्षों में बीज वितरण में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की है।
वर्ष 2000: 2,983.75 क्विंटल बीज वितरण
वर्ष 2025: 41,398.61 क्विंटल बीज वितरण
यह वृद्धि न केवल किसानों की जागरूकता का प्रतीक है, बल्कि यह दर्शाती है कि कोरबा अब गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन और प्रसार का अग्रणी केंद्र बन चुका है।
⚙️ रासायनिक उर्वरक वितरण में चार गुना वृद्धि — वैज्ञानिक खेती की दिशा में कदम
कोरबा जिले में उर्वरक वितरण में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
वर्ष 2000: कुल 4,652 टन
वर्ष 2025: कुल 17,349.28 टन
यह वृद्धि बताती है कि किसानों ने अब मृदा परीक्षण, संतुलित खाद उपयोग और वैज्ञानिक खेती को अपनाकर उत्पादन क्षमता में भारी सुधार किया है।
💧 सिंचाई, तकनीक और योजनाओं का सफल संगम
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, फसल बीमा योजना, और कृषि विज्ञान केंद्र व आत्मा परियोजना के माध्यम से किसानों को निरंतर प्रशिक्षण, परामर्श और सहायता प्रदान की जा रही है। इससे जोखिम प्रबंधन और उत्पादकता में व्यापक सुधार हुआ है।
कृषि में ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग, फसल प्रसंस्करण जैसी तकनीकों का अपनाना अब सामान्य हो गया है। इससे न केवल लागत घट रही है, बल्कि किसानों की आय भी बढ़ रही है।
👩🌾 महिला शक्ति और युवाओं की भूमिका — नई कृषि क्रांति का आधार
महिला स्व-सहायता समूहों ने कृषि क्षेत्र में नई पहचान बनाई है।
उन्होंने जैविक खाद निर्माण, बीज प्रसंस्करण और सब्जी उत्पादन जैसे कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाई है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है।
वहीं, युवा किसानों और कृषि उद्यमियों ने स्टार्टअप्स, फसल प्रसंस्करण इकाइयों और नवाचार आधारित खेती में नई राहें खोली हैं, जिससे कृषि अब “रोजगार देने वाला क्षेत्र” बन चुका है।
🏆 कृषि विभाग कोरबा की उपलब्धियाँ — मेहनत, नीतियों और नवाचार की मिसाल
कोरबा का कृषि विभाग इन 25 वर्षों की उपलब्धियों पर गर्व महसूस करता है। यह सफलता केवल योजनाओं का परिणाम नहीं, बल्कि किसानों के समर्पण, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्रशासनिक समर्थन की संयुक्त जीत है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार कृषि क्षेत्र को राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। कोरबा इसका जीवंत उदाहरण है — जहाँ खेतों की हरियाली, किसानों की मुस्कान और आत्मनिर्भरता की भावना ने एक नए युग की शुरुआत की है।
🌾 “कृषि की यह यात्रा खेतों की हरियाली से आगे बढ़कर, किसानों की खुशहाली की कहानी बन गई है।”


