एनटीपीसी की क्षतिपूर्ति राशि पर अटकी राहत — धनरास के ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, “दीपावली से पहले भुगतान करो” की मांग गूंजी






कोरबा, 17 अक्टूबर 2025।कोरबा जिले के राखड़ प्रभावित ग्राम धनरास में इस बार दीपावली की खुशियों पर सरकारी सुस्ती का साया मंडरा रहा है।
एनटीपीसी (नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन) द्वारा दी गई क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान न होने से नाराज सैकड़ों ग्रामीण शुक्रवार को सड़कों पर उतर आए और तहसील कार्यालय के सामने जोरदार प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों ने राजस्व विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चेतावनी दी —
“राखड़ हम झेलते हैं, मुआवजा कोई और खा जाता है — अब नहीं चलेगा!”
एनटीपीसी ने दी राशि, पर राजस्व विभाग ने रोक रखी भुगतान प्रक्रिया
ग्रामीणों का कहना है कि एनटीपीसी प्रबंधन ने राखड़ प्रभावित ग्रामों के लिए एक वर्ष की क्षतिपूर्ति राशि लगभग दो महीने पहले ही राजस्व विभाग को सौंप दी थी, लेकिन विभागीय प्रक्रिया के नाम पर यह रकम अब तक हितग्राहियों के खातों तक नहीं पहुंची है।
पहले यह राशि ग्राम पंचायत के खाते में जमा होती थी, जिसे सरपंच और पंचायत सदस्य प्रभावितों में वितरित करते थे।
लेकिन इस बार विभाग ने व्यवस्था बदल दी है — अब यह राशि सीधे ग्रामीणों के बैंक खातों में भेजी जानी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि “सीधी ट्रांसफर प्रणाली” लागू करने के नाम पर विभाग ने भुगतान रोक दिया है।
ग्रामीण बोले — राखड़ का जहर झेलते हैं, मुआवजा भी समय पर नहीं
ग्रामीणों ने बताया कि राखड़ डंपिंग से लगातार हो रहे प्रदूषण के कारण वे बीमारियों, फसलों की बर्बादी और पानी के दूषित होने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
यह क्षतिपूर्ति राशि उनकी जीवन-रेखा बन चुकी है, जिससे वे इलाज और रोज़मर्रा की जरूरतें पूरी करते हैं।
धनरास निवासी एक ग्रामीण ने कहा —
“हमारे खेत राखड़ से भर गए, सांस लेना मुश्किल है, और अब यह मुआवजा भी अटक गया। हर साल दीपावली से पहले राशि मिल जाती थी, लेकिन इस बार तो त्योहार अंधेरे में जा रहा है।”
एक अन्य महिला हितग्राही ने कहा —
“हमें छह-सात हजार रुपए मिलते हैं, उसी से घर चलता है। अब त्यौहार आने वाला है, बच्चों को कपड़े तक नहीं दिला पा रहे।”
दीपावली से पहले राहत की उम्मीद — एसडीएम ने दी आश्वस्ति
कटघोरा के एसडीएम तन्मय खन्ना ने इस मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि पहले यह राशि नकद रूप में दी जाती थी, लेकिन पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अब इसे बैंक ट्रांसफर प्रणाली से जोड़ा गया है।
उन्होंने बताया कि अब तक 1100 से अधिक ग्रामीणों के बैंक विवरण एकत्र किए जा चुके हैं, जिन्हें सिस्टम में एंट्री करने में तकनीकी विलंब हो रहा था।
एसडीएम ने कहा —
“एनटीपीसी प्रबंधन और तहसीलदार से समन्वय स्थापित किया गया है। सभी सत्यापित खातों में राशि दीपावली से पहले जमा करा दी जाएगी। ग्रामीणों को चिंता करने की जरूरत नहीं है।”
ग्रामीणों ने दी चेतावनी — भुगतान में और देरी हुई तो आंदोलन तेज होगा
ग्रामीण संगठनों ने साफ कहा है कि यदि दीपावली से पहले भुगतान नहीं किया गया, तो वे पुनः धरना-प्रदर्शन करेंगे और तहसील कार्यालय का घेराव करेंगे।
प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि हर साल राशि वितरण के समय राजस्व विभाग में लापरवाही और पक्षपात सामने आता है।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा —
“प्रदूषण झेलने वाले हम हैं, बीमारियां हमें होती हैं, लेकिन मुआवजा की फाइलें दफ्तर में धूल खाती रहती हैं। अब हम चुप नहीं बैठेंगे।”
धनरास में दीपावली की रोशनी क्षतिपूर्ति पर निर्भर
धनरास और आसपास के राखड़ प्रभावित ग्रामों के लिए यह क्षतिपूर्ति राशि केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि न्याय और राहत की उम्मीद है।
ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन पर टिकी है —
क्या दीपावली से पहले यह राशि उनके खातों में पहुंचेगी, या इस बार भी सरकारी देरी से गांव की दीयों की लौ फीकी रह जाएगी?





