कुसमुंडा में भू-विस्थापितों पर बाउंसरों का कहर! महिला बाउंसरों की मारपीट का वीडियो वायरल, क्षेत्र में आक्रोश की लहर






त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ***/ कोरबा एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र में कार्यरत एक निजी आउटसोर्सिंग कंपनी में भू-विस्थापितों के साथ महिला बाउंसरों द्वारा मारपीट का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में तीव्र आक्रोश फैल गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में दो महिला बाउंसर एक व्यक्ति को बेरहमी से पीटते और घसीटते हुए दिखाई दे रही हैं। इस घटना ने न केवल स्थानीय समुदाय को झकझोर दिया है, बल्कि कंपनी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वायरल वीडियो में दिखी बर्बरता
मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित निजी कंपनी ने अपने परिसर में स्थानीय भू-विस्थापितों से निपटने के लिए महिला बाउंसरों की एक टीम तैनात की है। यह वही लोग हैं, जिनकी भूमि खदान विस्तार परियोजनाओं में अधिग्रहित की गई थी। वायरल वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि दो महिला बाउंसर एक व्यक्ति को बाल पकड़कर, कॉलर से खींचते हुए ज़मीन पर गिरा रही हैं और उस पर शारीरिक बल प्रयोग कर रही हैं।
यह दृश्य देखकर क्षेत्र के ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों में भारी रोष है। लोगों का कहना है कि कंपनी प्रबंधन द्वारा विरोध करने वालों को डराने-धमकाने की यह रणनीति असहनीय है।
भू-विस्थापितों में उबाल – “हक़ की लड़ाई को दबाने की कोशिश”
स्थानीय भू-विस्थापित परिवारों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन लंबे समय से रोजगार और मुआवज़े की मांग करने वालों को न केवल नज़रअंदाज़ कर रहा है, बल्कि बाउंसरों के जरिए उत्पीड़न भी करवा रहा है।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा — “हमारी ज़मीन ली गई, वादा रोजगार का किया गया, लेकिन अब हमें बाउंसरों के डंडे दिखाए जा रहे हैं। यह न्याय नहीं, अत्याचार है।”
संगठनों की कड़ी प्रतिक्रिया – “कंपनी बन रही कानून से ऊपर”
क्षेत्र के सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने इस घटना को “मानव अधिकारों का खुला उल्लंघन” बताया है। उनका कहना है कि यह मामला सिर्फ एक वीडियो का नहीं बल्कि वर्षों से जारी शोषण की पराकाष्ठा है।
कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से तत्काल जांच कर महिला बाउंसरों और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
पहले भी उठ चुकी हैं आवाजें, प्रशासन मौन
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब भू-विस्थापितों के साथ दुर्व्यवहार हुआ हो। इससे पहले भी कुसमुंडा क्षेत्र में महिलाओं द्वारा अर्धनग्न प्रदर्शन जैसे कदम उठाए गए थे, परंतु प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी जिम्मेदार अधिकारियों और कंपनी पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े आंदोलन के लिए सड़क पर उतरेंगे।
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
घटना के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर निजी कंपनियों को किस अधिकार से स्थानीय लोगों पर बल प्रयोग करने की अनुमति दी जा रही है? क्या प्रशासन इन कंपनियों को शांति व्यवस्था संभालने का अधिकार सौंप चुका है?
जनता की मांग – “बाउंसर हटाओ, न्याय दिलाओ”
स्थानीय नागरिकों ने स्पष्ट कहा है कि भू-विस्थापितों के मुद्दों का समाधान बातचीत से हो, न कि लाठी और बल प्रयोग से। उन्होंने मांग की है कि सभी बाउंसरों को तुरंत हटाया जाए, पीड़ित व्यक्ति को न्याय मिले और कंपनी प्रबंधन को कठघरे में खड़ा किया जाए।
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कुसमुंडा क्षेत्र में वायरल हुए इस वीडियो ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या विकास की आड़ में इंसानियत की आवाज़ को कुचला जा रहा है? भू-विस्थापितों के हक़ की लड़ाई अब एक नई दिशा लेती दिख रही है। यदि प्रशासन ने सख्ती नहीं दिखाई तो आने वाले दिनों में यह मामला बड़ा जनआंदोलन बन सकता है।





