मां गौरी और काली मां के रूप में सजे नन्हे-मुन्ने बच्चे बने गरबा मैदानों के सितारे — भक्ति, उत्साह और परंपरा से सराबोर नवरात्रि उत्सव में छाया सांस्कृतिक रंग



त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/कोरबा। नवरात्रि उत्सव के पावन अवसर पर कोरबा शहर में इस बार एक विशेष और मनमोहक दृश्य देखने को मिला। गरबा-डांडिया मैदानों में जब मां गौरी और मां काली के रूप में सजे छोटे-छोटे बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे, तो पूरा वातावरण भक्ति और आनंद से झूम उठा। रंग-बिरंगे परिधानों और पारंपरिक श्रृंगार में सजे इन नन्हे-मुन्नों ने माता के स्वरूप को जीवंत कर दिया, जो श्रद्धालुओं और दर्शकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया।

गरबा नृत्य के बीच जब बच्चों ने माता गौरी के सौम्य रूप और काली मां के अद्भुत, वीर रूप को साकार किया, तो सभी श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। माता रानी की जयकारों से मैदान गूंज उठा और गरबा नर्तक भी इन बाल स्वरूपों के साथ नृत्य करने लगे।
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि नवरात्रि जैसे धार्मिक पर्वों में बच्चों की पारंपरिक भागीदारी न केवल सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखती है बल्कि आने वाली पीढ़ियों में आस्था और परंपरा का संचार भी करती है। आयोजन समितियों ने मंच से बच्चों की इस धार्मिक प्रस्तुति का स्वागत करते हुए उनका विशेष रूप से सम्मान किया।
गरबा-डांडिया की यह रंगीन और भक्तिमय रात देर तक उल्लासपूर्वक चलती रही। माता रानी के जयघोष, ढोल-नगाड़ों की गूंज और पारंपरिक परिधानों में सजे श्रद्धालुओं के बीच बच्चों की झांकी ने नवरात्रि उत्सव को एक नया और भावनात्मक आयाम दे दिया।
👉 यह दृश्य नवरात्रि की सांस्कृतिक एकता, धार्मिक आस्था और पारंपरिक विरासत का जीवंत उदाहरण बनकर सबके हृदय में अमिट छाप छोड़ गया।


