“नवरात्रि के छठे दिन मां Katyayani की आराधना: पारिवारिक पूजन से सुख, शांति और समृद्धि का वास”


कोरबा, 26 सितंबर 2025।
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ नवरात्रि पर्व हिन्दू धर्म का प्रमुख त्योहार है, जिसमें माता दुर्गा के नौ रूपों की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि के छठे दिन माता रानी का स्वरूप मां Katyayani के रूप में पूजनीय माना जाता है। यह दिन विशेष रूप से शक्ति, साहस और बुराई पर विजय के लिए समर्पित है।
छठे दिन की कथा
छठे दिन की कथा के अनुसार, मां Katyayani को अत्यंत साध्वी और वीर योद्धा के रूप में प्रतिष्ठित किया गया। देवी का जन्म महर्षि Katyayana के घर हुआ था, इसलिए उनका नाम Katyayani पड़ा। देवी ने असुरों के अत्याचार को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए अपनी शक्ति प्रकट की। मान्यता है कि जो भक्त इस दिन माता Katyayani की विधिपूर्वक पूजा करता है, उसके घर में सुख, समृद्धि और संतुलन बना रहता है।
माता रानी को क्या पसंद है

मां Katyayani को विशेष रूप से सफेद और लाल रंग के पुष्प, खीर, हलवा, दूध, मिठाईयाँ और फल अर्पित करना प्रिय है। साथ ही भक्त मां को दीप, अगरबत्ती और सुगंधित धूप अर्पित कर उनकी आराधना करते हैं। कथा में कहा गया है कि माता को सच्चे मन से अर्पित किए गए भोग और श्रद्धा से अत्यंत प्रसन्नता होती है।
माता रानी को क्या चढ़ाते हैं
छठे दिन पूजा में विशेष रूप से निम्नलिखित वस्तुएँ चढ़ाई जाती हैं:
सफेद और लाल पुष्प
फूलों से सजाई गई माला और तुलसी की पत्तियाँ
सुगंधित धूप और दीपक
खीर, हलवा, लड्डू, फल, दूध और शहद
नवदुर्गा मंत्रों का जाप एवं आरती
परिवार के साथ पूजन का महत्व
माता Katyayani की पूजा परिवार के साथ मिलकर करने से घर में सुख, सौहार्द और शांति बनी रहती है। ऐसा करने से परिवार के सभी सदस्य आपसी मतभेद भूलकर एकजुट और समर्थ बनते हैं, और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। साथ ही माता का आशीर्वाद प्राप्त कर कष्टों और बाधाओं से मुक्ति का अनुभव होता है।
विशेष महत्व
माता Katyayani की विशेष आराधना विवाहित जीवन में सफलता और संतान सुख के लिए की जाती है।
माता का पूजन करने से धैर्य, साहस और मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है।
भक्तों का मानना है कि इस दिन की आराधना से सभी नकारात्मक शक्तियाँ और अशुभ प्रभाव दूर होते हैं।
छठे दिन माता Katyayani के स्वरूप का पूजन विधिपूर्वक करना हर भक्त के लिए विशेष फलदायी होता है। श्रद्धालु सुबह-सुबह स्नान और शुद्ध वस्त्र धारण करके पूजा में शामिल होते हैं और संपूर्ण विधि के साथ माता को अर्घ्य अर्पित करते हैं।

