February 11, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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जन्म से मृत्यु तक सेवा करने वाली मितानिनें आंदोलित, रायपुर पहुंचने से पहले ही रोका गया आंदोलन

 

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ रायपुर/कोरबा। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ कही जाने वाली मितानिनें इन दिनों अपने अधिकारों को लेकर आंदोलनरत हैं। प्रदेश की लगभग 75,000 मितानिनें और उनसे जुड़े कर्मचारी राजधानी रायपुर में धरना देने की तैयारी में थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने राजधानी के चारों ओर से सख्त सुरक्षा घेरा बनाकर उन्हें धरना स्थल तक नहीं पहुंचने दिया।
कोरबा जिले से रायपुर के लिए निकली करीब 1000 मितानिनों को आज सुबह महोदा बैतलपुर टोल नाका (बिलासपुर-रायपुर मार्ग) पर पुलिस ने रोक दिया। भारी बारिश और कठिन परिस्थितियों में भी सुबह 5 बजे से किराए के वाहनों में निकली मितानिनों को बीच रास्ते में रोक दिए जाने के बाद वे सड़क पर बैठ गईं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगीं।

 

मितानिन केवल स्वास्थ्य कार्यकर्ता नहीं, बल्कि समाज की जीवन रक्षक भी हैं। गर्भवती महिलाओं की देखभाल से लेकर नवजात शिशुओं और माताओं तक को स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना, सामान्य बीमारियों की पहचान व इलाज में सहयोग करना, नशा मुक्ति अभियान चलाना, विकलांगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना, कुपोषण और संक्रामक रोगों के मरीजों की देखभाल, स्कूलों में मध्यान्ह भोजन और पोषण पर निगरानी, राशन वितरण की देखरेख, महिला व बाल संरक्षण, नाबालिग लड़कियों की शादी रोकने से लेकर महिला हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने तक—मितानिनों की भूमिका बहुआयामी और समाज के हर वर्ग के लिए महत्वपूर्ण है।
मितानिनों की प्रमुख मांगें :

ठेका प्रथा समाप्त कर सभी कर्मचारियों का स्थायीकरण व नियमितीकरण।
एनएचएम में संविलियन कर वेतन व सेवा शर्तों में सुधार।
वेतन व क्षतिपूर्ति राशि में 50% की वृद्धि।
साल 2002 से सेवा कर रहीं ये मितानिनें 23 वर्षों से लगातार आंदोलन के माध्यम से अपनी मांगें सरकार के सामने रख रही हैं। जुलाई के अंतिम सप्ताह में उन्होंने रायपुर के तूता धरना स्थल पर ज्ञापन देकर सरकार को 8 दिन का समय दिया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई न होने पर 7 अगस्त से क्रमिक धरना, हड़ताल और चक्का जाम की शुरुआत कर दी गई।
पुलिस प्रशासन की रोक के बावजूद प्रदेश के विभिन्न अंचलों से बड़ी संख्या में मितानिनें धरना स्थल पर पहुंचने में सफल रहीं और शासन के प्रतिनिधियों को पुनः ज्ञापन सौंपा। अब देखना यह है कि सरकार इस आंदोलन पर क्या कदम उठाती है या फिर मितानिनों को अपने संघर्ष को और आगे बढ़ाना पड़ेगा। संगठन की अगली रणनीति प्रतिनिधि मंडल द्वारा तय की जाएगी।

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