August 16, 2026

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घर-घर और पंडालों में विराजे गणपति बप्पा

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दस दिनों तक गूंजेगा भक्ति का स्वर, घर में सुख-समृद्धि और पंडालों में एकता का संदेश

कोरबा।गणेश चतुर्थी का पर्व आज पूरे जिले में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही भक्तों ने विधि-विधान से गणपति बप्पा की स्थापना अपने-अपने घरों और मोहल्लों के पंडालों में की। “गणपति बप्पा मोरया” और “मंगल मूर्ति मोरया” के जयघोष से शहर और गांवों का वातावरण भक्तिमय हो उठा।

🏡 घर में गणेश स्थापना का महत्व

घर में गणपति विराजने से सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा आती है।

परिवार में एकजुटता और प्रेम बढ़ता है।

विघ्नहर्ता गणेश सभी संकट और बाधाओं को दूर करते हैं।

बच्चों और युवाओं में धार्मिक संस्कार और भक्ति भावना का विकास होता है।

🏢 पंडालों में गणेश स्थापना का महत्व

पंडालों में गणेश स्थापना से समाज में एकता और भाईचारा मजबूत होता है।

भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक प्रवचनों से सामाजिक चेतना और जनजागरण होता है।

सामूहिक पूजा-अर्चना से आध्यात्मिक ऊर्जा और उत्सव का आनंद मिलता है।

दर्शनार्थियों से शहर का वातावरण धार्मिक उत्साह और भक्ति रस से सराबोर हो जाता है।

✨ गणेश उत्सव के 10 दिनों की विशेषता एवं पूजा विधि

1️⃣ गणेश चतुर्थी (प्रथम दिवस) – गणेश जी का विधिवत आवाहन कर स्थापना होती है। कलश स्थापना, मंत्रोच्चार, दूर्वा और मोदक अर्पित किए जाते हैं।

2️⃣ द्वितीय दिवस – अभिषेक और शृंगार का विशेष महत्व। भक्त गणेश जी को पुष्प और सुगंधित चंदन से सजाते हैं।

3️⃣ तृतीय दिवस – दुर्वा अर्पण दिवस माना जाता है। गणपति को 21 या 108 दूर्वा समर्पित करने की परंपरा है।

4️⃣ चतुर्थ दिवस – भजन-कीर्तन और आरती का आयोजन। सामूहिक संकीर्तन से भक्तिभाव और गहरा होता है।

5️⃣ पंचम दिवस – सांस्कृतिक आयोजन और प्रवचन होते हैं। परिवार और समाज में सद्भावना का संदेश दिया जाता है।

6️⃣ षष्ठम दिवस – गणेश सहस्त्रनाम पाठ और विशेष पूजन होता है।

7️⃣ सप्तम दिवस – गणेश जी को नैवेद्य और विशेष भोग अर्पित किया जाता है। (मोदक, लड्डू, फल)।

8️⃣ अष्टम दिवस (अष्टविनायक पूजन) – इस दिन आठ स्वरूपों में गणपति की पूजा की जाती है।

9️⃣ नवम दिवस – हवन और विशेष आरती से वातावरण शुद्ध और पवित्र होता है।

🔟 दशम दिवस (अनंत चतुर्दशी) – विधिविधान से गणेश जी की पूजा-अर्चना के बाद विसर्जन किया जाता है। “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयकारों से बप्पा को विदा किया जाता है।

👉 इस प्रकार घर में गणेश विराजने से परिवार में शांति और समृद्धि आती है, जबकि पंडालों में गणपति स्थापना समाज को एकजुट कर भक्ति और उत्सव का प्रतीक बन जाती है। आने वाले दस दिनों तक कोरबा सहित पूरे प्रदेश में गणेशोत्सव की भव्यता और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।

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