“शिव-पार्वती संग आस्था का संगम” – हरितालिका तीज पर सजी घर-घर भक्ति, पकवानों और परंपराओं से गूंजा उत्सव


कोरबा। सावन-भादो की सुहानी संध्या और हरियाली के बीच आज महिलाओं ने हरितालिका तीज का पावन पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया। सुबह से ही शहर, कॉलोनियों और गांवों में घरों में पूजा-अर्चना, पारंपरिक व्यंजन और भक्ति गीतों की गूंज रही। महिलाओं ने सजधजकर व्रत-पूजन किया और शिव-पार्वती के दिव्य मिलन की कथा का श्रवण कर अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगा।

🔹 मंदिरों में भक्ति का आलोक
राजेंद्र प्रसाद नगर फेज 1 हनुमान मंदिर, एमपी नगर, नगर निगम कॉलोनी शिव मंदिर, कालीबाड़ी, महामाया मंदिर सहित शिवालयों में दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भक्ति गीतों, आरती और घंटानाद ने वातावरण को पवित्र बना दिया। शिव-पार्वती की प्रतिमाओं को फूलों और श्रृंगार से सजाया गया। महिलाएं समूह बनाकर एक-दूसरे के घर भी पहुंचीं और सामूहिक रूप से तीज की कथा सुनी।

🔹 घर-घर बने पारंपरिक पकवान
तीज का उल्लास सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि घर-घर में पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू भी फैली रही। महिलाओं ने व्रत खोलने के लिए अपने घरों में विविध पकवान बनाए।

पूरी, कढ़ी, सब्ज़ियाँ, दही-बड़ा, खीर और सेवइयाँ प्रमुख रूप से तैयार की गईं।

कई घरों में गुजिया, अनरसा, ठेकुआ और मालपुआ भी बनाए गए, जो खासकर इस पर्व पर पारंपरिक स्वाद का हिस्सा होते हैं।
🔹 बिहारी परिवारों की विशेष परंपरा
कोरबा में बसे बिहारी परिवारों ने इस पर्व को अपनी परंपरागत शैली में मनाया।
उन्होंने ठेकुआ, खजूर, मालपुआ, दाल-पूरी, घी-चीनी से बने लड्डू और सेवइयाँ खासतौर पर बनाई।

महिलाओं ने मेहंदी रचाकर, लाल-पीली साड़ियों में सजधजकर, गीत-गाकर और झूला झूलकर तीज का उल्लास बढ़ाया।
बिहारी रीति में रातभर जागरण और कथा-भजन की परंपरा भी निभाई जाती है, जो इस बार कई कॉलोनियों में देखने को मिली।

🔹 आस्था और भावनाओं का पर्व
हरितालिका तीज केवल एक व्रत नहीं बल्कि स्त्री के समर्पण, त्याग और आस्था का प्रतीक है। मान्यता है कि माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त किया था। आज महिलाएं वही संकल्प लेकर व्रत रखती हैं कि उनके दांपत्य जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे।
महिलाओं की आँखों में शिव-पार्वती की कथा सुनते समय आस्था की नमी और चेहरे पर सौभाग्य की कामना साफ झलक रही थी।
👉 इस तरह हरितालिका तीज ने आज पूरे कोरबा जिले को भक्ति, उल्लास और स्वाद के संगम से भर दिया। घर-घर के व्यंजन, मंदिरों का श्रृंगार और स्त्रियों की अटूट श्रद्धा ने इस पर्व को यादगार बना दिया।

