ग्राम पंचायत मल्दी में भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ : सचिव पर फर्जी बिलिंग और गबन के गंभीर आरोप, ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी


बिलाईगढ़। ग्राम पंचायत मल्दी में पदस्थ पंचायत सचिव श्रीमती मंजू भारती पर भ्रष्टाचार, प्रशासनिक लापरवाही और योजनागत अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने जनपद पंचायत बिलाईगढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखित आवेदन सौंपकर सचिव की तत्काल निलंबन, स्थानांतरण और पांच वर्षों से चली आ रही पदस्थापना की जांच की मांग की है।


ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के फंड का दुरुपयोग, फर्जी बिलिंग और अपात्र हितग्राहियों को लाभ पहुंचाने जैसे मामले आम हो चुके हैं। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में पंचायत ने ₹4,18,465 खर्च दर्शाया, जिसमें से लगभग ₹3,95,000 पर फर्जी बिलिंग और गबन का शक जताया गया है।
📌 फर्जी बिलिंग और गबन के उदाहरण
बगलोटा गांव में हैंडपंप की मरम्मत पर वास्तविक खर्च ₹12,000 था, लेकिन सचिव द्वारा ₹1,01,840 का बिल प्रस्तुत किया गया।
पंचायत क्षेत्र में रोड मरम्मत का कोई कार्य नहीं हुआ, फिर भी ₹35,900 का बिल जारी किया गया।
बिना भौतिक सत्यापन कई कार्यों में लाखों रुपये खर्च दर्शाए गए।
📌 दीर्घकालीन पदस्थापना पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि सचिव पिछले 5 वर्षों से लगातार ग्राम पंचायत मल्दी में पदस्थ हैं, जबकि प्रशासनिक नियमों के अनुसार एक पंचायत में सचिव की पदस्थापना अधिकतम 2-3 वर्ष होनी चाहिए। लंबी पदस्थापना भ्रष्टाचार और गुटबाजी को बढ़ावा देती है।
📌 अन्य गंभीर आरोप
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने में ग्रामीणों से अवैध वसूली।
ग्रामसभा एवं बैठकों में पारदर्शिता की कमी।
योजनाओं की जानकारी आमजन तक न पहुंचाना।
📌 ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
- सचिव को तत्काल निलंबित एवं स्थानांतरित किया जाए।
- पिछले 5 वर्षों की सभी योजनाओं का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।
- गबन की गई राशि की वसूली कर पंचायत खाते में जमा कराई जाए।
- दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज कर सख्त कार्रवाई हो।
📌 आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो वे तहसील कार्यालय का घेराव कर शांतिपूर्ण आंदोलन करेंगे।
📌 विशेषज्ञों और कानून की राय
स्थानीय पंचायत विशेषज्ञों का कहना है कि एक ही पंचायत में दीर्घकालीन पदस्थापना भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा कारण है। वहीं, पंचायती राज अधिनियम और शासन के निर्देशों के अनुसार फर्जी बिलिंग और गबन जैसे मामलों पर प्रशासन को तत्काल जांच कर FIR दर्ज करनी चाहिए।
फिलहाल, प्रशासनिक चुप्पी ने ग्रामीणों के आक्रोश को और गहरा कर दिया है।

