March 19, 2026

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बालको की ‘मोर जल मोर माटी’ पहल से कृषि में डिजिटल नवाचार, ऑटोमेटेड वेदर एंड वाटर स्टेशन से सटीक खेती की ओर कदम

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/  बालकोनगर, 15 जुलाई 2025। वेदांता समूह की भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने ग्रामीण कृषि के क्षेत्र में तकनीकी क्रांति की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। अपनी प्रमुख कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) परियोजना ‘मोर जल मोर माटी’ के तहत कंपनी ने एक अत्याधुनिक ऑटोमेटेड वेदर एंड वाटर स्टेशन (AWWS) स्थापित किया है। यह स्मार्ट तकनीक अब पायलट चरण में पांच किलोमीटर के दायरे में स्थित गांवों के 200 से अधिक किसानों को सीधे लाभ पहुंचा रही है। कंपनी की योजना है कि भविष्य में इसका विस्तार करते हुए हजारों किसानों को इस सुविधा से जोड़ा जाए।

यह पहल भारत सरकार की डिजिटल इंडिया मिशन के अनुरूप है और ग्रामीण किसानों को आधुनिक सूचना एवं संचार तकनीक (ICT) के साथ जोड़ रही है। बदलते जलवायु परिदृश्य और तकनीक आधारित कृषि समाधानों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए, AWWS किसानों को रीयल-टाइम मौसम पूर्वानुमान, मिट्टी की नमी की स्थिति, कीट व रोगों का आकलन और फसल सुरक्षा सलाह उपलब्ध कराता है। इस तकनीक के माध्यम से किसान सिंचाई प्रबंधन, बुवाई और कटाई का सही समय तय कर पा रहे हैं, जिससे उनकी उत्पादकता बढ़ रही है और नुकसान में कमी आ रही है।

AWWS से प्राप्त जानकारी ग्राम विकास समितियों, व्हाट्सएप चैनलों और गांवों में चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाई जा रही है। यह तकनीक कृषि-बुद्धिमत्ता (Agri-Intelligence) को गांव-गांव तक ले जा रही है और किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक संवेदनशील और सशक्त बना रही है।

बालको के सीईओ और डायरेक्टर श्री राजेश कुमार ने कहा,

> “हमारे लिए तकनीक सिर्फ औद्योगिक दक्षता का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समुदायों को सशक्त करने का भी एक जरिया है। ‘मोर जल मोर माटी’ परियोजना में AWWS की स्थापना किसानों को सटीक जानकारी देकर कृषि में सुधार लाने की दिशा में एक अहम कदम है। एक डिजिटल-प्रथम संगठन के रूप में हम ऐसे नवाचारों को अपनी सामाजिक पहलों का हिस्सा बना रहे हैं, ताकि मजबूत और टिकाऊ समुदायों का निर्माण हो सके।”

‘मोर जल मोर माटी’ परियोजना के अंतर्गत बालको किसानों को सतही जल प्रबंधन, बहुफसली खेती, सिंचाई के आधुनिक तरीकों और वर्षा पर निर्भरता को कम करने में सहयोग दे रहा है। इसके अलावा, परियोजना के माध्यम से लाख उत्पादन, बागवानी, पशुपालन और गैर-वन उपज पर आधारित आय के नए स्रोत भी विकसित किए जा रहे हैं, जिससे किसानों को सालभर आजीविका के अवसर मिल सकें।

परियोजना के हिस्से के रूप में स्थापित वेदांता एग्रीकल्चर एंड रिसोर्स सेंटर किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और इनपुट सपोर्ट प्रदान कर रहा है। अब तक इस परियोजना ने 5,700 से अधिक किसानों को लाभान्वित किया है, जिससे वे टिकाऊ कृषि प्रथाओं को अपनाकर आर्थिक रूप से समृद्ध हो रहे हैं।

🌱 यह पहल न केवल खेती को आधुनिक बना रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी डिजिटल युग में एक नई दिशा दे रही है।

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