March 18, 2026

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“छह वर्षों से निष्क्रिय 345 राजनीतिक दल होंगे डीलिस्ट – निर्वाचन आयोग ने शुरू की देशव्यापी कार्रवाई”

छह वर्षों से निष्क्रिय 345 राजनीतिक दल होंगे डीलिस्ट – निर्वाचन आयोग ने शुरू की देशव्यापी कार्रवाई

रायपुर, 26 जून 2025/
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/  भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने देश में निष्क्रिय पड़े राजनीतिक दलों के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई की है। आयोग ने ऐसे 345 पंजीकृत अप्रमाणित राजनीतिक दलों (RUPPs) को डीलिस्ट (सूची से हटाने) करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो विगत छह वर्षों से किसी भी चुनाव में भाग नहीं ले सके हैं और जिनका कार्यालय भौतिक रूप से अस्तित्वहीन पाया गया है।

यह निर्णय मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में तथा निर्वाचन आयुक्तगण डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी की उपस्थिति में लिया गया। आयोग के अनुसार, वर्ष 2019 से अब तक जिन RUPPs ने लोकसभा, विधानसभा या उपचुनावों में भाग नहीं लिया है, उन्हें सूची से हटाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।

भारत में वर्तमान में 2800 से अधिक पंजीकृत अप्रमाणित राजनीतिक दल दर्ज हैं, जिनमें से कई दलों ने न तो निर्वाचन प्रक्रिया में भाग लिया है और न ही उनकी कार्यालय उपस्थिति सत्यापित हो सकी है। आयोग ने इस संबंध में राष्ट्रव्यापी समीक्षा अभियान चलाया, जिसके प्रथम चरण में 345 ऐसे दलों की पहचान की गई।

इन दलों को डीलिस्ट करने से पूर्व भारत निर्वाचन आयोग ने सभी संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों (CEOs) को निर्देश जारी किए हैं कि वे प्रत्येक दल को कारण बताओ नोटिस जारी करें। इसके तहत सभी संबंधित दलों को अपनी बात रखने और स्पष्टीकरण देने का अवसर प्रदान किया जाएगा। अंतिम निर्णय भारत निर्वाचन आयोग द्वारा सुनवाई उपरांत लिया जाएगा।

भारत में राजनीतिक दलों का पंजीकरण लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के अंतर्गत किया जाता है। इसके तहत पंजीकृत दलों को कर छूट सहित कई विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं। परंतु यदि कोई दल लगातार निष्क्रिय रहता है, तो ऐसे विशेषाधिकारों का दुरुपयोग होने की संभावना बनी रहती है।

भारत निर्वाचन आयोग का यह कदम राजनीतिक प्रणाली को पारदर्शी, स्वच्छ और जिम्मेदार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान केवल प्रथम चरण है और आगे भी यह प्रक्रिया चरणबद्ध रूप से जारी रहेगी, ताकि निष्क्रिय और अव्यवस्थित दलों को सूची से हटाकर चुनावी व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।

इस पहल को लोकतंत्र को मजबूत बनाने तथा फर्जी पंजीकरणों के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में एक निर्णायक और अनुशासित कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

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