26 लोग पर ग्राम मलगांव निवासी बन पक्के मकान बताकर लगभग 17 करोड़ का मुआवजा लेने का आरोप



* दस्तावेज जब्त
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ***/सार्वजनिक क्षेत्र के वृहद उपक्रम कोल् इंडिया के अधीन संचालित एसईसीएल बिलासपुर की कोरबा-पश्चिम क्षेत्र में स्थापित खुले मुहाने की गेवरा कोयला परियोजना अंतर्गत एसईसीएल की मेगा परियोजना अंतर्गत दीपका कोल माइंस के विस्तार के लिए 26 बाहरी लोगों द्वारा मलगांव निवासी बनकर 17 करोड़ रुपये का फर्जी मुआवजा की शिकायत पर सीबीआई की टीम ने दस्तावेज जब्त किया है। CBI की छापे के बाद EOW की टीम भी कोरबा में दस्तावेज खंगालने में जुटी है।
कोरबा जिला में राख कोयला, डीएमएफ व पीएससी घोटाला के बाद अब भूमि अधिग्रहण घोटाले की जांच में सीबीआई की इंट्री हो गई है। जानकारी के अनुसार करीब 20 वर्ष पहले वर्ष 2004 में दीपका विस्तार परियोजना के लिए ग्राम मलगांव की 400 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था। जिसके 235 वास्तविक प्रभावित बताये जा रहे हैं। इनमें 136 प्रभावित अब तक मुआवजा ले चुके हैं। जबकि कुल 110 करोड़ रुपये मुआवजा वितरण होना है। वर्ष 2022 में मुआवजा वितरण प्रशासन के माध्यम से किया गया। इस बीच ग्राम मलगांव के ग्रामीणों ने एसईसीएल के विभागीय विजिलेंस को मुआवजा वितरण की शिकायत की। इसकी जांच के दौरान पता चला कि मुआवजा की सूची में शामिल 26 ऐसे लोगों का नाम है, जो न तो मलगांव में रहते हैं और नहीं उनके नाम से जमीन थी। मुआवजा प्रकरण बनाए जाने के दौरान राजस्व अमले ने मिलीभग कर फर्जी दस्तावेज तैयार कर लिए और मुआवजा भी प्राप्त कर लिया गया।
बताया जा रहा हैं की इस पूरे गड़बड़ी में एक ही परिवार के दो हितग्राही ने खुद भी अधिक मुआवजा राशि प्राप्त किया और बाद में फर्जीवाड़े में भी बिचौलिए की भूमिका भी निभाई। इसके साथ ही यह भी जानकारी मिली हैं कि घोटाला 17 करोड़ से अधिक का है। 20 लाख से अधिक गड़बड़ी में जांच का अधिकार नहीं होने पर विजिलेंस ने इस मामले को सीबीआई के सुपुर्द कर दिया है।
* बिचौलिए के यहां पहली छापेमारी कर दस्तावेज किए गए जब्त
पहली छापामार कार्यवाही सीबीआई रायपुर की टीम ने हरदीबाजार निवासी व उसके भतीजे के घर एक साथ छापामार की गई। जारी सर्च वारंट के आधार पर उनके घर की तलाशी ली गई। इस दौरान कुछ दस्तावेज भी हाथ लगने की जानकारी सामने आई है।

