गौमुखी सेवाधाम संस्था को किया गया सम्मानित



* सचिव योगेश जैन ने प्राप्त किया सम्मान
* 24 वर्षों से वनवासियों के सर्वांगीण विकास व मुख्य धारा से जोड़ने कार्य कर रहा सेवाधाम
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती को पूरे भारत वर्ष में “जनजातीय गौरव दिवस” के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर कोरबा कलेक्टोरेट परिसर के सभागृह में आयोजित कार्यक्रम में जनजातीय क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्था गौमुखी सेवा धाम, देवपहरी को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश के कैबिनेट मंत्री लखनलाल देवांगन द्वारा संस्था को सम्मानित किया गया। संस्था के प्रतिनिधि के रूप में यह सम्मान सचिव योगेश जैन एवं सहसचिव डॉ. राजीव गुप्ता को प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
सचिव योगेश जैन ने गौमुखी सेवा धाम के उद्देश्य, स्थापना एवं सेवा कार्य के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि गौमुखी सेवा धाम संस्था की स्थापना 15/09/2000 को पर्वतीय अंचल देवपहरी में की गयी थी। यह परियोजना वनवासी बंधुओं के सर्वांगीण विकास व उन्हे मुख्य धारा से जोड़ने के लिये कार्य कर रही है। 40 ग्रामो मे रहने वाले लाभार्थी वनवासी बंधुओं की कुल संख्या लगभग 20,000 है। दुर्गम पर्वतीय अंचल में विकास की मुख्य धारा से अलग-थलग पड़े वनवासी बंधुओं के उत्थान के लिये सेवा प्रकल्प की स्थापना की गई व मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराकर पांच आयामों में सेवा कार्य प्रारंभ किया गया।
समिति द्वारा प्रारंभ किये गये सेवा कार्य के पांच आयाम हैं जिसके अंतर्गत धर्म जागरण व आध्यात्मिक विकास करना, सामाजिक पुनर्रचना, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा व नैतिक विकास, आर्थिक विकास आदि हैं।
इस परियोजना अंतर्गत प्रकल्प के कार्यों से क्षेत्र में पर्याप्त सकारात्मक सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन आया है। लोगों की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति में सुधार आया है। धर्म के प्रति आस्था व धार्मिक कार्यों में वृद्धि हुई है, एवं धर्म परिवर्तन पर प्रभावी रोक लगी है। प्रत्येक 40 ग्रामों में ग्रामीणों की मांग पर देवालय की स्थापना की गयी है एवं रामायण आदि धार्मिक ग्रंथों का प्रत्येक बनवासी परिवार में वितरण किया गया है। शिक्षा एवं चिकित्सा सुविधा का इस क्षेत्र में नितांत अभाव था। प्रकल्प के कार्यों से इनका विस्तार एवं लोगों मे शिक्षा एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता आई है। लोगों मे शराब आदि बुराईयों के प्रति झुकाव कम हुआ है। कृषि की गुणवत्ता में और खान-पान के स्तर में सुधार आया है। लोगों द्वारा सब्जियों के उत्पादन एवं भोजन में दाल-सब्जियों के प्रयोग करने की आदत विकसित हुई है। जिससे वे अधिक पौष्टिक भोजन ग्रहण कर रहे हैं। इस कार्य से दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र में निवासरत बनवासी बंधु सर्वाधिक लाभांवित हुए हैं। उनके जीवन स्तर में काफी सुधार आया है।

