February 15, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

खबरें जरा हट के

**लिवर के लिये उपयोगी यकृत बूस्टर क्वाथ भी निशुल्क पिलाया गया।*

*लिवर के सुस्वास्थ्य हेतु संबंधित स्वास्थ्य पुस्तिका भी निशुल्क प्रदान की गई ।*

*तंबाखू, शराब एवं पित्तवर्धक आहार हेपेटाइटिस का मुख्य कारण-डॉ.नागेंद्र शर्मा।*

*हेपेटाइटिस से बचाव हेतु नशे से रहें दूर एवं पित्तवर्धक आहार से करें परहेज़ -डॉ.नागेंद्र शर्मा।*

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा     28 जुलाई वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे (विश्व यकृत शोथ दिवस) पर लायंस क्लब कोरबा एवरेस्ट एवं श्री शिव औषधालय के संयुक्त तत्वाधान में हेपेटाइटिस (यकृत शोथ) रोग से बचाव, उपचार तथा कारण से संबंधित जागरुकता दिनाँक 28 जुलाई 2024 रविवार को श्री शिव औषधालय एमआईजी 20, आर.पी.नगर फेस 2 निहारिका कोरबा छत्तीसगढ में आयोजित विशेष आयुर्वेद-योग चिकित्सा परामर्श एवं उपचार शिविर में अंचलवासी लाभान्वित हुये। शिविर में विशेष रूप से अपनी चिकित्सकीय सेवायें प्रदान करने वाले लायंस क्लब कोरबा एवरेस्ट के सचिव, छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध अनुभवी आयुर्वेद चिकित्सा विशेषज्ञ नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया की हेपेटाइटिस यानि यकृतशोथ लिवर को संक्रमित करने वाला रोग है। जो लिवर में सूजन तथा जलन पैदा करता है। जिसे हेपेटाइटिस (यकृत शोथ) कह्ते हैं।

उन्होंने बताया की वैसे तो हेपेटाइटिस रोग का कोई निश्चित कारण नहीं है पर मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, तंबाखू, शराब एवं पित्तवर्धक आहार का सेवन इसके प्रमुख कारण हैं। त्वचा और आंखों में पीलापन, गहरे रंग का मूत्र होना, अत्यधिक थकावट होना, जी मिचलाना, भूख न लगना, उल्टी होना, पेट में दर्द व सूजन का होना इस तरह के लक्षणों का लंबे समय तक बने रहना हेपेटाइटिस यानि यकृत शोथ का कारण बन सकता है। अतः इन लक्षणों की उपस्थिति में समय रहते चिकित्सक से संपर्क कर जांच अवश्य करानी चाहिये। शिविर में लिवर के लिये उपयोगी यकृत बूस्टर क्वाथ भी निशुल्क पिलाया गया। साथ ही लिवर के सुस्वास्थ्य हेतु संबंधित स्वास्थ्य पुस्तिका भी निशुल्क प्रदान की गई । शिविर में चिकित्सक नाड़ीवैद्य डॉ.नागेन्द्र नारायण शर्मा के अलावा श्री शिव औषधालय की संचालिका श्रीमती प्रतिभा शर्मा, लायंस क्लब कोरबा एवरेस्ट के अध्यक्ष लायन शिव जायसवाल, कोषाध्यक्ष लायन गजेंद्र राठौड, नेत्रनन्दन साहू, अश्वनी बुनकर, मनीष कौशिक, कमल धारिया, देवबली कुंभकार, सिद्धराम शाहनी, राकेश इस्पात, चक्रपाणि पांडेय, कमला कुंभकार एवं संध्या बरला ने विशेष रूप से उपस्थित होकर अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

 

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