February 14, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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त्रिनेत्र टाइम्स   कोरबा जिलान्तर्गत वनमंडल कटघोरा के पसान रेंज में सामने आए पौधरोपण घोटाले में नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार दो स्थानों पर 56 लाख खर्च कर कराए गए 21 बोर में पानी ही नहीं है। 2 साल बाद भी बिजली कनेक्शन नहीं किया गया है। किराए में जनरेटर लाकर टेस्टिंग की तो 15 से 20 मिनट ही पानी निकला। इसी वजह से गर्मी में पौधे भी मर गए। बोर की खुदाई भी कहीं 150 तो कहीं 250 फीट की गई है और बिल 400 से अधिक फीट का बनाया गया है।
वन विभाग के कैंपा मद से पसान रेंज के जल्के बीट में ग्राम पंचायत पिपरिया के भाठापारा और लचरीडाड़ खालपारा में सिंचित पौधरोपण के लिए 52 करोड़ रुपए से अधिक की मंजूरी मिली है, लेकिन जितनी जमीन बताई गई है मौके पर उतनी नहीं है। घोटला सामने आने के बाद वन विभाग के अधिकारी रविवार को योजना की फाइल को खंगालते रहे। एपीओ 2019-20 के तहत पौधरोपण का काम वर्ष 2021 में शुरू हुआ।
उस समय डीएफओ को स्टापडैम घोटाला सामने आने के बाद रायपुर मुख्यालय अटैच कर दिया गया था। उनके बाद डीएफओ प्रेमलता यादव थी। अब कुमार निशांत डीएफओ हैं। वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष राम प्रसाद ने कहा कि मेरे सामने ही बोर खनन किया गया है। पानी ठीक से नहीं निकला। बिजली का कनेक्शन नहीं है तो पंप कहां से लगाएंगे। 8 महीने से चौकीदारों को भुगतान भी नहीं हुआ है।
* चौकीदारों को वेतन नहीं दिया तो छोड़ ​दिया काम
योजना के तहत पार्ट 2 में आम, अमरूद, आंवला के साथ ही फलदार पौधे लगाए गए थे। इसकी सुरक्षा के लिए 4 चौकीदार रखे गए थे। उन्हें 4 महीने से वेतन नहीं देने पर काम छोड़ दिया। फेंसिंग भी ठीक से नहीं की गई थी। इस वजह से चार दिन में ही पौधों को मवेशी खा गए। इसके बाद फिर से सागौन समेत अन्य प्रजाति के पौधे लगाए गए हैं। यहां जमीन का रकबा 115 हेक्टेयर बताया गया है, लेकिन यहां भी जमीन कम है।
पसान के तत्कालीन रेंजर धर्मेंद्र चौहान ने कहा कि डेढ़ साल पहले मैं जब पदस्थ था तो सभी पौधे जीवित थे। बोर चालू हालत में थे। जमीन का भी जियो टैगिंग के जरिए सत्यापन के बाद काम मंजूर हुआ था। अब मैं नारंगी क्षेत्र में पदस्थ हूं। दस्तावेज हैंडओवर कर दिया हूं।

 

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