February 11, 2026

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कोरबा रेल कॉरिडोर प्रबंधन की मनमानी से अंचल के ग्रामीण त्रस्त होकर होने लगे लामबंद

 


कोरबा  गेवरा-पेंड्रा रेल कॉरिडोर से प्रभावित अंचल के ग्रामीण प्रबंधन की मनमानी से नाराज हैं। प्रबंधन के खिलाफ कभी भी इन ग्रामीणों का आक्रोश फूट सकता है। ग्राम जवाली, कोलिहामुड़ा, डोकरीखार, रालडोंगरी, मोहनपुर व आसपास के गांव में निवासरत किसान गेवरा रोड-पेंड्रा रोड तक बिछाई जाने वाली रेलवे लाइन से काफी त्रस्त हो गए हैं।
रेल कॉरिडोर प्रबंधन ने किसानों की जमीनों को अधिग्रहित कर लिया है। मुआवजा व अन्य मूलभूत सुविधा नहीं मिलने से ग्रामीण, प्रबंधन के खिलाफ लामबंद होते नजर आ रहे हैं। किसानों की बाकी बची जमीन पर रेल कॉरिडोर प्रबंधन ने मिट्टी को डंप कर दिया है, इससे किसान अपने खेतों में फसल उगाने से वंचित हो गए हैं, क्योंकि उनकी जमीन से पानी निकासी की व्यवस्था नहीं है। इससे किसानों में नाराजगी है। वहीं रेल कॉरिडोर के निर्माण से प्रभावित ग्राम डोकरीखार के ग्रामीणों व स्कूली छात्र-छात्राओं का रोड से संपर्क टूट चुका है। इससे गांव के लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
भाजपा नेता एवं खाद्य आयोग के पूर्व अध्यक्ष ज्योतिनंद दुबे ने प्रभावित गांव जवाली, कोलिहामुड़ा, डोंगरी, राल, डोकरीखार, मोहनपुर के ग्रामीणों से रूबरू होते हुए अंचल का निरीक्षण किया। उन्होंने रेल प्रबंधन से मांग की है कि रेल कॉरिडोर से प्रभावित किसानों की जमीनों का सीमांकन राजस्व हल्का पटवारी की ओर से किया जाए, ताकि ग्रामीणों को पता चल सके कि अधिग्रहण के पश्चात उक्त खसरा नंबर में कितनी जमीन बची है। उन्होंने कहा कि कई प्रभावित किसान ऐसे हैं, जिन्हें अभी तक उचित मुआवजा और सुविधा प्रदान नहीं की गई है। यदि प्रबंधन किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं करता है, तो ग्रामीणों के साथ मिलकर आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

 

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