VSK ऐप पर बवाल: ऑनलाइन अटेंडेंस के आधार पर वेतन कटौती के आदेश से शिक्षकों में उबाल, छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी
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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा VSK (विद्या समीक्षा केंद्र) ऐप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर शिक्षकों एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों का वेतन आहरित किए जाने संबंधी जारी आदेश का छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ ने तीखा विरोध किया है। संघ ने इसे शिक्षकों के हितों के विपरीत, अव्यावहारिक तथा तकनीकी खामियों से भरे सिस्टम पर आधारित निर्णय बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की है।
संघ का कहना है कि प्रदेश के अधिकांश ग्रामीण एवं दूरस्थ विद्यालयों में इंटरनेट नेटवर्क की समस्या आज भी गंभीर बनी हुई है। ऐसे में VSK ऐप के माध्यम से शत-प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। कई विद्यालयों में शिक्षक समय पर उपस्थित होने के बावजूद ऐप “लोकेशन एरर” दर्शाता है, जबकि कई बार ‘चेक-इन’ करने के बाद भी उपस्थिति दर्ज नहीं होती। शाम को ‘चेक-आउट’ के दौरान ऐप दोबारा ‘चेक-इन’ करने का संदेश देता है, जिससे पूरी उपस्थिति प्रक्रिया ही संदिग्ध हो जाती है।
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष संजय ठाकुर, कार्यकारी प्रांताध्यक्ष उमेश भारती गोस्वामी, महामंत्री मनोज राय, संभागीय अध्यक्ष डॉ. तरुण सिंह राठौर, जिलाध्यक्ष मानसिंह राठिया, कार्यकारी जिलाध्यक्ष धरनीधर साहू, सचिव हबेलसिंह अघरिया तथा जिला संगठन मंत्री छोटेलाल पटेल ने संयुक्त रूप से कहा कि तकनीकी रूप से असफल ऐप के आधार पर शिक्षकों का वेतन रोकना या कटौती करना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। विभाग पहले ऐप की कमियों को दूर करे, उसके बाद ही ऐसी व्यवस्था लागू करने पर विचार करे।
जिलाध्यक्ष मानसिंह राठिया ने कहा कि शिक्षक संघ लंबे समय से विद्यालयों में बायोमीट्रिक मशीन के माध्यम से प्रमाणिक उपस्थिति दर्ज कराने की मांग करता आ रहा है। संघ की मांग है कि सभी विद्यालयों में चरणबद्ध तरीके से बायोमीट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू की जाए। जब तक यह व्यवस्था पूरी तरह स्थापित नहीं हो जाती, तब तक पारंपरिक शिक्षक उपस्थिति पंजी के आधार पर ही शिक्षकों का नियमित एवं पूर्ण वेतन जारी रखा जाए।
संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि VSK ऐप के आधार पर वेतन भुगतान संबंधी आदेश वापस नहीं लिया गया और शिक्षकों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ, तो प्रदेशभर के शिक्षक व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली किसी भी परिस्थिति की पूरी जिम्मेदारी शासन और शिक्षा विभाग की होगी।
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ ने शासन से मांग की है कि शिक्षकों की व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए तकनीकी खामियों वाले सिस्टम को सुधारने पर प्राथमिकता दी जाए तथा किसी भी कर्मचारी के वेतन को तकनीकी त्रुटियों के आधार पर प्रभावित न किया जाए।


