July 23, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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शी-एसओसी बना महिला नेतृत्व का सशक्त मॉडल, अत्याधुनिक तकनीक के सहारे औद्योगिक सुरक्षा की हर गतिविधि पर पैनी नजर
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** बालकोनगर। औद्योगिक सुरक्षा के क्षेत्र में महिलाओं ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम दर्ज कर ली है। कभी सुरक्षा व्यवस्था को केवल पुरुषों की जिम्मेदारी माना जाता था, लेकिन अब यह धारणा तेजी से बदल रही है। वेदांता समूह की कंपनी बालको ने इस बदलाव को नई पहचान देते हुए अपने सेंट्रल सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर (सीएसओसी) की पूरी कमान महिला कर्मचारियों को सौंप दी है। अब यह अत्याधुनिक सुरक्षा केंद्र ‘शी-एसओसी (Security Harmony and Excellence)’ के रूप में चौबीसों घंटे पूरी तरह महिला टीम द्वारा संचालित किया जा रहा है।
यह पहल केवल जिम्मेदारियों का हस्तांतरण नहीं, बल्कि महिलाओं की क्षमता, तकनीकी दक्षता, नेतृत्व कौशल और निर्णय लेने की योग्यता पर संगठन के अटूट विश्वास का प्रतीक बनकर उभरी है। आधुनिक औद्योगिक सुरक्षा के इस नए मॉडल ने यह साबित कर दिया है कि सुरक्षा केवल शारीरिक ताकत नहीं, बल्कि सतर्कता, तकनीकी समझ, त्वरित निर्णय और अनुशासित कार्यशैली का परिणाम होती है।
सैकड़ों कैमरों पर हर पल नजर, हर चुनौती का त्वरित समाधान
बालको का सीएसओसी कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण नियंत्रण केंद्र है, जहां से पूरे संयंत्र परिसर में स्थापित सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की निगरानी की जाती है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल अलर्ट जारी करना, सुरक्षा टीमों के बीच समन्वय स्थापित करना, आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेना और सुरक्षा संचालन को निर्बाध बनाए रखना—इन सभी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का सफल संचालन अब महिला टीम कर रही है।
24 घंटे और सातों दिन सक्रिय रहने वाला यह कंट्रोल सेंटर आधुनिक तकनीक, डिजिटल निगरानी प्रणाली और प्रशिक्षित महिला कर्मियों की दक्षता के कारण सुरक्षा प्रबंधन का मजबूत आधार बन चुका है।
नेतृत्व में महिलाओं ने पेश की नई मिसाल
शी-एसओसी की प्रभारी वर्षा द्विवेदी ने कहा कि बालको ने उन्हें सुरक्षा संचालन जैसी चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी सौंपकर उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है। आधुनिक तकनीक, नियमित प्रशिक्षण और संगठन के विश्वास ने उन्हें हर परिस्थिति में बेहतर निर्णय लेने की क्षमता प्रदान की है। उनका मानना है कि महिलाएं भी सुरक्षा जैसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में पूरी दक्षता के साथ नेतृत्व कर सकती हैं।
वहीं रेखा श्रीवास्तव का कहना है कि सुरक्षा केवल शारीरिक शक्ति का विषय नहीं है। सतर्कता, अनुशासन, जिम्मेदारी, संवाद कौशल और समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता ही वास्तविक सुरक्षा का आधार है। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने अपने समर्पण और कार्यकुशलता से यह साबित कर दिया है कि किसी भी जिम्मेदारी का निर्धारण लिंग नहीं, बल्कि योग्यता करती है।
पूजा टंडन के अनुसार सुरक्षा संचालन में हर दिन नई चुनौतियां सामने आती हैं, जो सीखने और खुद को बेहतर बनाने का अवसर देती हैं। उनका कहना है कि जब समय पर लिया गया निर्णय किसी बड़े जोखिम को टाल देता है, तब अपने कार्य की वास्तविक सफलता और जिम्मेदारी का एहसास होता है।
महिला सशक्तिकरण का प्रेरक मॉडल बना बालको
बालको का ‘शी-एसओसी’ आज केवल एक सुरक्षा नियंत्रण केंद्र नहीं, बल्कि समावेशी कार्य संस्कृति, समान अवसर और महिला नेतृत्व की सशक्त मिसाल बन चुका है। यह पहल दर्शाती है कि यदि महिलाओं को उचित प्रशिक्षण, आधुनिक संसाधन और नेतृत्व का अवसर मिले तो वे किसी भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को पूरी दक्षता और आत्मविश्वास के साथ निभा सकती हैं।
औद्योगिक सुरक्षा के क्षेत्र में बालको का यह नवाचार न केवल महिलाओं के बढ़ते नेतृत्व को नई पहचान दे रहा है, बल्कि देश के औद्योगिक संस्थानों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभर रहा है। आधुनिक तकनीक और महिला नेतृत्व के इस सफल समन्वय ने यह संदेश दिया है कि बदलते दौर में सुरक्षा की सबसे बड़ी ताकत योग्यता, सजगता और पेशेवर उत्कृष्टता है।

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