July 22, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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एसईसीएल की श्रमिक राजनीति में ‘महाभूकंप’! रेशम लाल यादव और अख्तर उस्मानी के नेतृत्व में सैकड़ों नेताओं ने बदला पाला, यूनियन में मची खलबली

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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। एसईसीएल की श्रमिक राजनीति में मंगलवार को ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने पूरे कोयला क्षेत्र की सियासी और श्रमिक हलचल को नई दिशा दे दी। लंबे समय से एकजुट दिखाई दे रहे श्रमिक संगठन में बड़ी टूट सामने आई है। वरिष्ठ श्रमिक नेता रेशम लाल यादव और अख्तर जावेद उस्मानी के नेतृत्व में विभिन्न क्षेत्रों के सैकड़ों पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने एक साथ कोयला मजदूर पंचायत (एचएमएस) की सदस्यता ग्रहण कर ली।
कोरबा-पश्चिम गेवरा क्षेत्र में आयोजित मिलन समारोह को एसईसीएल के श्रमिक इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक और संगठनात्मक घटनाओं में से एक माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि आठ अलग-अलग एरिया से जुड़े कई प्रभावशाली श्रमिक नेता अपने समर्थकों के साथ नए संगठन में शामिल हुए, जिससे श्रमिक राजनीति का समीकरण बदलता नजर आ रहा है।
बैठक में फूटा असंतोष, लिया बड़ा फैसला
मिलन समारोह से पहले आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में कई श्रमिक नेताओं ने वर्तमान नेतृत्व की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। नेताओं ने कहा कि मजदूर हितों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से नहीं उठाया जा रहा था, जिसके कारण उन्होंने नया रास्ता चुनने का निर्णय लिया। बैठक के बाद सर्वसम्मति से कोयला मजदूर पंचायत (एचएमएस) को मजबूत करने का संकल्प लिया गया।
विनय सिंह की मौजूदगी में हुआ शक्ति प्रदर्शन
कोयला मजदूर पंचायत (एचएमएस) के केंद्रीय महामंत्री विनय सिंह की मौजूदगी में आयोजित सदस्यता समारोह में शामिल नेताओं और कार्यकर्ताओं का स्वागत किया गया। इस दौरान संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। समारोह में श्रमिक एकता, संगठन विस्तार और मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई को और मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।
कोयला क्षेत्रों में बदलेगा श्रमिक राजनीति का समीकरण
सदस्यता ग्रहण करने के बाद श्रमिक नेताओं ने कहा कि अब गेवरा, दीपका, कुसमुंडा, कोरबा और अन्य कोयला क्षेत्रों में मजदूरों की समस्याओं को और मजबूती से उठाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि संगठन को जमीनी स्तर तक विस्तार देकर मजदूरों के अधिकारों और सुविधाओं के लिए निर्णायक संघर्ष किया जाएगा।
राजनीतिक और श्रमिक हलकों में इस घटनाक्रम को बड़ी संगठनात्मक पुनर्संरचना के रूप में देखा जा रहा है। एक साथ बड़ी संख्या में नेताओं और कार्यकर्ताओं के पाला बदलने से एसईसीएल की श्रमिक राजनीति में नए समीकरण बनने तय माने जा रहे हैं। आने वाले दिनों में इसका असर विभिन्न खदान क्षेत्रों की यूनियन गतिविधियों और नेतृत्व संरचना पर भी देखने को मिल सकता है।

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