सीएसईबी की जर्जर कॉलोनी पर चलेगा बुलडोजर! 324 मकानों को तोड़ने की तैयारी, अवैध कब्जाधारियों और बाहरी किराएदारों में मची हलचल
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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। सीएसईबी कोरबा-पूर्व स्थित कॉलोनी के 324 जर्जर मकानों को ध्वस्त करने की प्रक्रिया एक बार फिर तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ राज्य उत्पादन कंपनी प्रबंधन ने महाराष्ट्र की मे. के.के. घरत एंड कम्पनी को कार्यादेश जारी कर पांच माह के भीतर सभी चिन्हित भवनों को डिस्मेंटल करने की जिम्मेदारी सौंपी है। कॉलोनी में नोटिस चस्पा होने के बाद वर्षों से कब्जा जमाए बैठे लोगों और बाहरी किराएदारों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार पुष्पलता गार्डन से लेकर कलेक्ट्रेट मार्ग तक स्थित कई जर्जर भवनों को खाली कराने के लिए एक सप्ताह पूर्व नोटिस जारी किया गया है। विभाग का कहना है कि ये मकान अब रहने योग्य नहीं बचे हैं और किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
कॉलोनी में सरकारी आवासों पर कब्जे का बड़ा सवाल
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि जिन आवासों का निर्माण मूल रूप से सीएसईबी कर्मचारियों के लिए किया गया था, उनमें बड़ी संख्या में बाहरी किराएदार और कब्जाधारी वर्षों से निवास कर रहे हैं। कई मकानों में ऐसे लोग भी रह रहे हैं जिनका विभाग से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। वहीं कुछ आवासों पर विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के कब्जे की भी चर्चा है।
यही वजह है कि मकान खाली कराने की कार्रवाई को आसान नहीं माना जा रहा। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि प्रशासन और पुलिस की मदद के बिना कार्रवाई पूरी करना संभव नहीं होगा।
छह दशक पुराने हो चुके हैं मकान
करीब 60 वर्ष पहले निर्मित ये आवास समय के साथ जर्जर हो चुके हैं। रखरखाव के अभाव और लगातार बढ़ती क्षति के कारण अधिकांश भवन खतरनाक स्थिति में पहुंच गए हैं। सीएसईबी कर्मचारियों के नए आवासों में स्थानांतरित होने के बाद कई मकान खाली हुए, लेकिन समय के साथ उन पर अन्य लोगों ने कब्जा जमा लिया।
पहले भी अधूरी रह गई थी कार्रवाई
पिछले वर्ष भी इन मकानों को तोड़ने का ठेका दिया गया था, लेकिन संबंधित कंपनी बीच में ही काम छोड़कर चली गई थी। इसके कारण पूरी कार्रवाई अधर में लटक गई थी। अब नए ठेकेदार को जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद विभाग इस बार कार्रवाई को अंतिम रूप तक पहुंचाने की तैयारी में है।
प्रशासनिक सहयोग की मांग
कार्यपालन अभियंता (सिविल) श्रीमती तिग्गा ने कलेक्टर से मुलाकात कर स्थिति से अवगत कराया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध कब्जों और लंबे समय से रह रहे लोगों को हटाने के लिए प्रशासनिक और पुलिस सहयोग अत्यंत आवश्यक है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि वर्षों से विवाद और कब्जों के कारण चर्चा में रही सीएसईबी कॉलोनी में प्रशासन कब और किस तरह बड़ी कार्रवाई करता है। यदि योजना के अनुसार अभियान चला, तो आने वाले महीनों में कॉलोनी का नक्शा पूरी तरह बदलता नजर आ सकता है।


