सीएसईबी कॉलोनी लकड़ी चोरी कांड: एक गिरफ्तारी से नहीं थम रहे सवाल, आखिर किसकी मिलीभगत से अभनपुर पहुंच गई सरकारी लकड़ी?



त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//** कोरबा। सीएसईबी कॉलोनी से लकड़ी चोरी के मामले में पुलिस द्वारा एक आरोपी की गिरफ्तारी और घटना में प्रयुक्त हाइड्रा व मिनी ट्रक की जब्ती के बाद भी कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वन विभाग और पुलिस की कार्रवाई के बीच अब सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी को कोरबा से अभनपुर तक पहुंचाने की प्रक्रिया में किसी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी को इसकी भनक कैसे नहीं लगी?
प्राप्त जानकारी के अनुसार वन विभाग द्वारा पेड़ों की कटाई का कार्य एक ठेकेदार को सौंपा गया था। आरोप है कि पेड़ों की कटाई के बाद लकड़ियों को विभागीय डिपो में जमा कराने के बजाय सीधे अभनपुर स्थित एक आरामील भेज दिया गया। मामले की जानकारी सामने आने पर डीएफओ प्रेमलता यादव के निर्देश पर सिविल लाइन थाना में शिकायत दर्ज कराई गई और आरोपी सुनील गुप्ता को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
वन विभाग की टीम ने घटना में प्रयुक्त हाइड्रा और मिनी ट्रक को जब्त किया, वहीं बालको रेंज की टीम अभनपुर पहुंचकर आरामील से लकड़ियों को भी बरामद कर वापस लाई। पुलिस ने पहले से दर्ज बीएनएस की धारा 303(2) के प्रकरण में अन्य धाराएं जोड़ते हुए कार्रवाई आगे बढ़ाई है।
सिर्फ एक आरोपी या फिर बड़ा नेटवर्क?
मामले में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि कोरबा से अभनपुर तक लकड़ी का परिवहन कोई छोटी या गुप्त प्रक्रिया नहीं थी। पेड़ों की कटाई, लकड़ी की लोडिंग, हाइड्रा और ट्रक की व्यवस्था, परिवहन और आरामील तक पहुंचाने जैसे कई चरणों से गुजरने के बावजूद किसी अधिकारी या जिम्मेदार व्यक्ति को इसकी जानकारी नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि लकड़ी विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार डिपो में जमा नहीं हुई तो इसकी निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी? कटाई से लेकर परिवहन तक की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
मिलीभगत की आशंका पर उठ रहे सवाल
शहर में चर्चा है कि इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी को सैकड़ों किलोमीटर दूर भेज देना किसी एक व्यक्ति के बूते की बात नहीं हो सकती। यदि लकड़ी वास्तव में नियमों को दरकिनार कर आरामील पहुंचाई गई तो रास्ते में परिवहन, दस्तावेजों और निगरानी तंत्र की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
लोगों का सवाल है कि आखिर लकड़ी लोड होने से लेकर अभनपुर पहुंचने तक संबंधित विभागों और जिम्मेदार तंत्र को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली? क्या यह केवल लापरवाही थी या फिर इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका है?
जांच के दायरे में आएंगे अन्य जिम्मेदार?
हालांकि पुलिस और वन विभाग ने प्राथमिक कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच केवल एक व्यक्ति तक सीमित रहेगी या फिर पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका भी सामने लाई जाएगी।
सीएसईबी कॉलोनी लकड़ी चोरी प्रकरण अब सिर्फ चोरी का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह वन संपदा की सुरक्षा, विभागीय निगरानी व्यवस्था और संभावित मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला बन गया है। शहरवासियों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच कर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाए, ताकि भविष्य में सरकारी संपत्ति की इस तरह की बंदरबांट पर रोक लग सके।


