योगिनी एकादशी 11 जुलाई को मनाई जाएगी, भगवान विष्णु की आराधना से मिलेगा पुण्य और मोक्ष का फल : पं. डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा



त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//* कोरबा। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी इस वर्ष 11 जुलाई 2026, शनिवार को श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मनाई जाएगी। नाड़ीवैद्य पंडित डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया कि सनातन धर्म में एकादशी तिथि का अत्यंत विशेष महत्व है। प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में आने वाली दोनों एकादशियां भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित होती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है तथा मृत्यु के उपरांत मोक्ष की प्राप्ति होती है।
उन्होंने बताया कि एकादशी तिथि 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को प्रातः 8:16 बजे प्रारंभ होकर 11 जुलाई 2026, शनिवार को प्रातः 5:22 बजे तक रहेगी। शास्त्रों में दशमी युक्त एकादशी का त्याग कर द्वादशी युक्त एकादशी का व्रत करने का विधान बताया गया है। इसी शास्त्रीय मान्यता के अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत 11 जुलाई 2026, शनिवार को रखा जाएगा। वहीं व्रत का पारण 12 जुलाई 2026, रविवार को प्रातः 5:30 बजे से 8:20 बजे के बीच किया जाएगा।
पंडित डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया कि योगिनी एकादशी का व्रत करने से भगवान श्री विष्णु एवं माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने वाले श्रद्धालु को 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य प्राप्त होता है। यह व्रत जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करने वाला माना गया है।
उन्होंने बताया कि योगिनी एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान कर भगवान श्री विष्णु का गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए। भगवान को पुष्प, तुलसी दल एवं सात्विक भोग अर्पित कर योगिनी एकादशी की कथा का श्रवण, विष्णु सहस्रनाम का पाठ तथा भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की आरती करनी चाहिए। इस दिन दान-पुण्य, पीपल पूजन, रात्रि जागरण तथा संयम का विशेष महत्व बताया गया है।
पौराणिक कथा का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि अलकापुरी के राजा यक्षराज कुबेर के यहां हेम माली नामक सेवक भगवान शिव की पूजा के लिए प्रतिदिन मानसरोवर से पुष्प लाता था। एक दिन कर्तव्य में विलंब होने पर कुबेर ने उसे कोढ़ का श्राप दे दिया। बाद में महर्षि मार्कण्डेय के निर्देशानुसार हेम माली ने योगिनी एकादशी का विधिपूर्वक व्रत किया, जिसके प्रभाव से वह श्रापमुक्त हो गया। तभी से इस एकादशी को पापों का नाश करने वाली और कल्याणकारी एकादशी माना जाता है।
पंडित डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे योगिनी एकादशी के पावन अवसर पर श्रद्धा, संयम और विधि-विधान के साथ भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना कर धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लें।


