10 जुलाई से शुरू होगा योगिनी एकादशी व्रत, श्रद्धा और विधि-विधान से होगी भगवान विष्णु की आराधना



नाड़ीवैद्य पंडित डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया एकादशी का महत्व, व्रत का शुभ समय, पूजन विधि और पौराणिक कथा।
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//* आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी इस वर्ष 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। यह व्रत भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है। धार्मिक मान्यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत श्रद्धा, भक्ति और विधि-विधान से करने पर भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
नाड़ीवैद्य पंडित डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया कि एकादशी तिथि 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को प्रातः 8:16 बजे प्रारंभ होगी तथा 11 जुलाई 2026, शनिवार को प्रातः 5:22 बजे तक रहेगी। व्रत का पारण 12 जुलाई 2026, रविवार को प्रातः 5:30 बजे से 8:20 बजे के बीच किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि योगिनी एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के पापों का नाश होता है तथा भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत एवं पूजा करने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।
पूजन विधि के संबंध में उन्होंने बताया कि प्रातःकाल स्नान कर भगवान श्री विष्णु का गंगाजल से अभिषेक करें। उन्हें पुष्प, तुलसी दल एवं सात्विक भोग अर्पित करें। योगिनी एकादशी की कथा का श्रवण करें, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें तथा भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की आरती करें। इस दिन तामसिक भोजन का त्याग, संयम, दान-पुण्य, पीपल पूजन तथा भगवान के नाम का स्मरण विशेष फलदायी माना गया है।
योगिनी एकादशी की पौराणिक कथा के अनुसार अलकापुरी के राजा कुबेर के यहां हेम नामक माली कार्य करता था। एक दिन अपने कर्तव्य में विलंब होने पर कुबेर ने उसे कोढ़ी होने का श्राप दे दिया। बाद में महर्षि मार्कण्डेय के निर्देश पर हेम माली ने योगिनी एकादशी का व्रत किया, जिसके प्रभाव से वह श्रापमुक्त हो गया। तभी से इस व्रत को पापों से मुक्ति और कल्याण प्रदान करने वाला माना जाता है।
पंडित डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे योगिनी एकादशी पर श्रद्धा, संयम और विधि-विधान के साथ भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना करें तथा समाज में सेवा, सद्भाव और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लें।


