2022 की शिकायत पर नहीं हुई कार्रवाई, 2023 तक चारागाह पर बस गई बस्ती: नकटी भूमि विवाद के दस्तावेजों ने खोली पूरी कहानी



त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//* रायपुर। ग्राम नकटी की शासकीय चारागाह भूमि पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बीच अब इस पूरे मामले से जुड़े सरकारी दस्तावेज सामने आए हैं, जिन्होंने कई महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा करते हुए प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दस्तावेजों के अनुसार जिस भूमि पर आज अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है, वहां आवासीय योजना विकसित करने की प्रक्रिया वर्ष 2020 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही शुरू हो गई थी। वहीं वर्ष 2022 में चारागाह भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण की लिखित शिकायत प्रशासन को दिए जाने के बावजूद समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से वर्ष 2023 तक अतिक्रमण कई गुना बढ़ गया।
दस्तावेजों के अनुसार 1 सितंबर 2020 को छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल ने ग्राम नकटी के खसरा क्रमांक 420 की 15.479 हेक्टेयर शासकीय भूमि सामान्य आवासीय योजना के लिए आवंटित करने का प्रस्ताव कलेक्टर रायपुर को भेजा। इसके बाद भूमि आवंटन की विधिवत प्रक्रिया शुरू हुई और सार्वजनिक इश्तिहार जारी कर विभिन्न विभागों से निर्धारित समय सीमा में आपत्तियां और सुझाव भी आमंत्रित किए गए।
जनवरी 2021 में स्वास्थ्य, शिक्षा सहित विभिन्न शासकीय विभागों से प्रस्तावित भूमि के संबंध में राय मांगी गई, लेकिन किसी भी विभाग ने भूमि आवंटन पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई। इसके बाद भी भूमि आवंटन की प्रक्रिया नियमानुसार आगे बढ़ती रही।

इसी दौरान 26 जून 2021 को हुए राजस्व सर्वेक्षण और बाद में गृह निर्माण मंडल की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि प्रस्तावित भूमि के केवल लगभग 3 हेक्टेयर क्षेत्र में कच्चे मकान और बाड़ी स्वरूप सीमित अतिक्रमण था। राजस्व अभिलेखों में भी यह दर्ज किया गया कि संबंधित भूमि गृह निर्माण मंडल की आवासीय योजना के लिए प्रस्तावित है।
इसके बाद वर्ष 2022 में चारागाह भूमि पर लगातार बढ़ते अतिक्रमण को लेकर जिला प्रशासन को लिखित शिकायत सौंपी गई। शिकायत में स्पष्ट रूप से अवैध कब्जों को तत्काल रोकने तथा आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की गई थी। हालांकि दस्तावेजों के अनुसार शिकायत के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
सरकारी अभिलेखों के मुताबिक अगले एक वर्ष में स्थिति पूरी तरह बदल गई। जहां वर्ष 2021 तक लगभग 3 हेक्टेयर क्षेत्र में सीमित अतिक्रमण था, वहीं वर्ष 2023 तक लगभग 15 हेक्टेयर भूमि पर पक्के मकान, बड़े निर्माण और स्थायी कब्जे हो गए। गृह निर्माण मंडल की रिपोर्ट में भी इस तेजी से बढ़े अतिक्रमण का विस्तृत उल्लेख किया गया है।
दस्तावेजों में अवैध निर्माणों का विस्तृत ब्यौरा भी दर्ज है। रिपोर्ट के अनुसार 1000 वर्गफीट से लेकर 10,000 वर्गफीट से अधिक क्षेत्रफल वाले कई बड़े मकानों का निर्माण किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि बड़ी संख्या में कब्जाधारियों के गांव या अन्य स्थानों पर पहले से मकान उपलब्ध हैं, जबकि सीमित संख्या में ऐसे परिवार मिले जिनके पास कोई अन्य आवास नहीं है।
अब जब ये सरकारी दस्तावेज सार्वजनिक हुए हैं, तो सबसे बड़ा प्रश्न प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर उठ रहा है। सवाल यह है कि यदि वर्ष 2022 में प्राप्त शिकायत पर समय रहते कार्रवाई कर अवैध निर्माण रोक दिए जाते, तो चारागाह भूमि पर इतने बड़े पैमाने पर कब्जा और बाद में व्यापक बेदखली की नौबत शायद नहीं आती। यही वजह है कि यह मामला अब केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि शासकीय भूमि की सुरक्षा, प्रशासनिक जिम्मेदारी और समय पर कार्रवाई की आवश्यकता को लेकर भी गंभीर बहस का विषय बन गया है।


