12वें वेतन समझौते पर कोयला श्रमिकों का फूटा गुस्सा: ‘अब आर-पार की लड़ाई’, AICWF ने दी राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी



“रिकॉर्ड उत्पादन हमारा, लेकिन वेतन समझौता अधर में क्यों?”— कोल इंडिया प्रबंधन और केंद्र सरकार के खिलाफ श्रमिकों में बढ़ा आक्रोश
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//* कोरबा। देश की ऊर्जा व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले कोयला श्रमिकों का धैर्य अब टूटता नजर आ रहा है। वर्षों से खदानों में कठिन परिस्थितियों के बीच काम कर देश के उद्योगों और बिजलीघरों को ऊर्जा उपलब्ध कराने वाले लाखों कोयला कर्मचारियों ने 12वें वेतन समझौते में हो रही देरी को लेकर नाराजगी जाहिर की है। इस मुद्दे पर ऑल इंडिया कोल वर्कर्स फेडरेशन (AICWF) ने संघर्ष का बिगुल फूंकते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो देशभर के कोयला क्षेत्रों में व्यापक आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
संगठन का आरोप है कि एक ओर कोयला कंपनियां लगातार मुनाफे के नए रिकॉर्ड बना रही हैं, वहीं दूसरी ओर उन उपलब्धियों के पीछे दिन-रात मेहनत करने वाले श्रमिकों को उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। इससे कर्मचारियों और उनके परिवारों में गहरा असंतोष व्याप्त है।
“मुनाफा बढ़ा, उत्पादन बढ़ा, लेकिन श्रमिकों का हक क्यों अटका?”
AICWF नेताओं का कहना है कि कोयला श्रमिकों ने कठिन परिस्थितियों में भी उत्पादन बढ़ाकर देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है। बिजली संकट से लेकर औद्योगिक जरूरतों तक, हर चुनौतीपूर्ण समय में श्रमिकों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई है। इसके बावजूद 12वें वेतन समझौते को लेकर स्पष्ट निर्णय नहीं होना कर्मचारियों के मनोबल को प्रभावित कर रहा है।
संगठन का कहना है कि वेतन समझौता केवल वेतन वृद्धि का विषय नहीं, बल्कि श्रमिकों के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है।
कोयला क्षेत्रों में तेज हुआ जनजागरण अभियान
AICWF ने विभिन्न कोयला परियोजनाओं, खदान क्षेत्रों और श्रमिक बस्तियों में जनजागरण अभियान शुरू कर दिया है। संगठन के पदाधिकारी कर्मचारियों से संपर्क कर उन्हें वेतन समझौते की स्थिति और आगे की रणनीति से अवगत करा रहे हैं।
श्रमिक नेताओं का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। इसके लिए विभिन्न कोयला कंपनियों के कर्मचारियों को एक मंच पर लाने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।
श्रमिकों की प्रमुख मांगें
12वां वेतन समझौता तत्काल लागू किया जाए।
वेतन समझौते में हो रही देरी पर स्पष्ट स्थिति बताई जाए।
लंबित आर्थिक लाभों का शीघ्र भुगतान किया जाए।
कोयला कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
श्रमिकों के साथ न्यायपूर्ण और सम्मानजनक व्यवहार किया जाए।
“मजदूर का सम्मान ही राष्ट्र निर्माण का आधार”
AICWF ने कहा कि देश के विकास, उद्योगों की प्रगति और बिजली उत्पादन के पीछे कोयला श्रमिकों का सबसे बड़ा योगदान है। ऐसे में उनके अधिकारों की अनदेखी करना उचित नहीं है। संगठन का मानना है कि यदि श्रमिक संतुष्ट और सुरक्षित होंगे तभी उत्पादन और विकास की गति भी मजबूत होगी।
संघर्ष की राह पर श्रमिक संगठन
श्रमिक नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यह लड़ाई किसी व्यक्तिगत लाभ की नहीं, बल्कि लाखों श्रमिक परिवारों के भविष्य और सम्मान की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि यदि प्रबंधन और सरकार ने जल्द सकारात्मक पहल नहीं की तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
कोयला क्षेत्रों में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और श्रमिकों की निगाहें अब आगामी निर्णयों पर टिकी हुई हैं। संगठन ने दो टूक कहा है कि “श्रमिकों का अधिकार उनका हक है, और हक मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।”


