August 13, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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कुसमुंडा में श्रमिकों का सब्र टूटा: लंबित मांगों पर AICWF का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी से प्रबंधन में मची हलचल

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बारहवां वेतन समझौता लागू करो, श्रमिकों को न्याय दो – ऑल इंडिया कोल वर्कर्स फेडरेशन ने खोला मोर्चा
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//* कोरबा/कुसमुंडा। दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की कुसमुंडा परियोजना में श्रमिकों एवं कर्मचारियों की वर्षों से लंबित समस्याओं को लेकर अब असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। ऑल इंडिया कोल वर्कर्स फेडरेशन (AICWF) ने प्रबंधन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि श्रमिकों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो संगठन बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
फेडरेशन के क्षेत्रीय सचिव सजीटी जॉन ने श्रमिक हितों से जुड़े कई गंभीर मुद्दों को उठाते हुए कहा कि कोयला उत्पादन में दिन-रात मेहनत करने वाले श्रमिकों की जायज मांगों की लगातार उपेक्षा की जा रही है। इससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है और कार्यस्थलों पर असंतोष का माहौल बन रहा है।
बारहवें वेतन समझौते को लेकर बढ़ा दबाव
फेडरेशन ने अपनी प्रमुख मांगों में बारहवें वेतन समझौते को तत्काल लागू करने की मांग को सबसे ऊपर रखा है। संगठन का कहना है कि वेतन समझौते में हो रही देरी के कारण हजारों कोयला श्रमिक आर्थिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं। श्रमिकों को उनके अधिकारों के अनुरूप लाभ नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
सुरक्षा, आवास और मूलभूत सुविधाओं का मुद्दा भी गरमाया
AICWF ने आरोप लगाया कि कई कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। श्रमिकों को बेहतर सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य सुविधाएं, आवास और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भी ठोस पहल की आवश्यकता है। संगठन ने ठेका श्रमिकों के शोषण पर रोक लगाने तथा स्थायी रोजगार के अवसर बढ़ाने की भी मांग उठाई है।
प्रबंधन को दी खुली चेतावनी
फेडरेशन ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि लंबित समस्याओं का समयबद्ध समाधान नहीं हुआ तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा करेगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। श्रमिकों का धैर्य अब जवाब देने लगा है और वे अपने अधिकारों के लिए निर्णायक संघर्ष करने को तैयार हैं।
कोयला क्षेत्र में बढ़ सकती है हलचल
कुसमुंडा परियोजना एसईसीएल की सबसे महत्वपूर्ण एवं उत्पादन क्षमता वाली परियोजनाओं में शामिल है। ऐसे में यदि श्रमिक संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाता है तो इसका प्रभाव उत्पादन और प्रबंधन दोनों पर पड़ सकता है। श्रमिक संगठनों की सक्रियता ने कोयला क्षेत्र में नई राजनीतिक और औद्योगिक हलचल पैदा कर दी है।
श्रमिकों का संदेश
फेडरेशन ने नारा दिया है—
समस्याओं का समाधान करो, अन्यथा आंदोलन के लिए तैयार रहो।”
संगठन का कहना है कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि हजारों कोयला श्रमिकों के सम्मान, अधिकार और भविष्य की लड़ाई है। आने वाले दिनों में प्रबंधन और श्रमिक संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर पूरे कोयलांचल की नजरें टिकी हुई हैं।

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