August 13, 2026

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परमा एकादशी आज: अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य देने वाला दुर्लभ व्रत, कुबेर को मिला था धनाध्यक्ष पद, राजा हरिश्चंद्र को लौटा था राज्य

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पुरुषोत्तम मास की परमा एकादशी का विशेष संयोग, 11 जून को रखा जाएगा व्रत, 12 जून को होगा पारण
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// कोरबा। पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) में आने वाली परमा एकादशी को सनातन धर्म में अत्यंत पुण्यदायी और दुर्लभ एकादशियों में गिना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत का फल अश्वमेध यज्ञ के समान माना गया है। पौराणिक कथाओं में वर्णन मिलता है कि इसी व्रत के प्रभाव से धन के देवता कुबेर को धनाध्यक्ष का पद प्राप्त हुआ था तथा सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र को अपना खोया हुआ राज्य, परिवार और वैभव पुनः प्राप्त हुआ था।
विद्वानों के अनुसार अधिक मास में पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की एकादशी को परमा एकादशी कहा जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे करने से मनुष्य के पापों का नाश होकर सुख, समृद्धि, वैभव तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है।
11 जून को रखा जाएगा परमा एकादशी व्रत
वैदिक पंचांग के अनुसार पुरुषोत्तम मास (ज्येष्ठ अधिक मास) के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 11 जून 2026, गुरुवार को प्रातःकाल व्रत हेतु मान्य रहेगी।
एकादशी तिथि प्रारंभ – 11 जून 2026 को रात्रि 12:57 बजे
एकादशी तिथि समाप्त – 11 जून 2026 को रात्रि 10:36 बजे
व्रत का दिन – 11 जून 2026, गुरुवार
पारण का समय – 12 जून 2026, शुक्रवार प्रातः 5:23 बजे से 8:10 बजे तक
धार्मिक परंपरा के अनुसार उदया तिथि के आधार पर 11 जून को परमा एकादशी व्रत रखा जाएगा।
वर्ष में केवल अधिक मास में आती हैं दो विशेष एकादशियां
धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि सामान्यतः वर्ष में 24 एकादशियां होती हैं, लेकिन जब पुरुषोत्तम मास या अधिक मास आता है तो दो अतिरिक्त एकादशियां जुड़ जाती हैं और संख्या 26 हो जाती है।
अधिक मास की ये दो विशेष एकादशियां हैं—
कृष्ण पक्ष की परमा एकादशी
शुक्ल पक्ष की पद्मिनी एकादशी
इन दोनों का महत्व अन्य एकादशियों की अपेक्षा अत्यंत विशेष माना गया है।
युधिष्ठिर को स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने बताया था महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से अधिक मास की एकादशी के महत्व के बारे में पूछा था। तब भगवान श्रीकृष्ण ने बताया कि पुरुषोत्तम मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली परमा एकादशी समस्त पापों का नाश करने वाली, धन-वैभव प्रदान करने वाली तथा उत्तम गति देने वाली है।
भगवान ने कहा कि जो श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन करता है, उसे महान यज्ञों के समान पुण्य प्राप्त होता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा उस पर बनी रहती है।
सुमेधा ब्राह्मण की कथा से जुड़ा है व्रत का महात्म्य
पुराणों के अनुसार काम्पिल्य नगरी में सुमेधा नामक एक धर्मात्मा ब्राह्मण अपनी पतिव्रता पत्नी के साथ रहता था। दोनों अत्यंत गरीब थे, लेकिन अतिथि सेवा और धर्म-कर्म में कभी पीछे नहीं हटते थे। आर्थिक तंगी से परेशान होकर एक दिन ब्राह्मण ने परदेस जाकर धन कमाने का विचार किया, लेकिन उसकी पत्नी ने भाग्य और कर्म पर विश्वास रखने की सलाह दी।
इसी दौरान उनके घर महर्षि कौण्डिल्य ऋषि पधारे। दंपति ने श्रद्धा से उनकी सेवा की। उनकी भक्ति और सेवा भावना से प्रसन्न होकर ऋषि ने उन्हें पुरुषोत्तम मास की परमा एकादशी व्रत करने का उपदेश दिया।
ऋषि ने बताया कि यह व्रत दरिद्रता दूर करता है, धन-वैभव प्रदान करता है तथा भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त कराता है। ऋषि के निर्देशानुसार सुमेधा और उनकी पत्नी ने श्रद्धा-भक्ति से व्रत किया। व्रत के प्रभाव से उनकी गरीबी दूर हो गई और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन हुआ। अंततः वे भगवान विष्णु के परम धाम को प्राप्त हुए।
ऐसे करें परमा एकादशी व्रत
धर्मशास्त्रों के अनुसार व्रती को प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। भगवान विष्णु की प्रतिमा अथवा चित्र के समक्ष जल और पुष्प लेकर व्रत का संकल्प करना चाहिए। इसके बाद विधिवत पूजा-अर्चना, विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ तथा भजन-कीर्तन करना चाहिए। श्रद्धानुसार ब्राह्मणों को भोजन और दान-दक्षिणा देकर व्रत का पुण्य और बढ़ जाता है।
परमा एकादशी से मिलते हैं ये शुभ फल
पापों का नाश होता है।
धन, वैभव और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
पारिवारिक सुख एवं शांति बढ़ती है।
भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल मिलता है।
मोक्ष एवं उत्तम लोक की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
धार्मिक संदेश
परमा एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम, सेवा और भगवान विष्णु के प्रति समर्पण का पर्व है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से इस व्रत का पालन करता है, उसके जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं और उसे सुख, समृद्धि तथा आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
— नाड़ीवैद्य पंडित डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा

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