रंगों से संवर रहा भविष्य: कटघोरा की चित्रकला कार्यशाला में निखर रही बच्चों की प्रतिभा, कला के साथ मिल रहा आत्मविश्वास और रोजगार का मार्ग



राष्ट्रीय स्तर के कलाकार संदीप सारथी दे रहे प्रशिक्षण, 80 से अधिक बच्चे सीख रहे सृजन, कल्पना और आत्मनिर्भरता का हुनर
Tirentra Time’s Korba**//**//* कटघोरा। आज के डिजिटल दौर में जहां बच्चे मोबाइल और स्क्रीन की दुनिया में अधिक समय व्यतीत कर रहे हैं, वहीं संस्कार भारती जिला इकाई कोरबा द्वारा आयोजित 10 दिवसीय चित्रकला कार्यशाला बच्चों की रचनात्मकता को नई उड़ान देने का कार्य कर रही है। 1 जून से 10 जून तक नगर कटघोरा में आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण शिविर में लगभग 70 से 80 बच्चे उत्साहपूर्वक चित्रकला की बारीकियां सीख रहे हैं।
कार्यशाला में राष्ट्रीय स्तर के चित्रकार एवं प्रशिक्षक संदीप कुमार सारथी बच्चों को रंगों, रेखाओं और कल्पनाओं की दुनिया से परिचित करा रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को केवल चित्र बनाना ही नहीं सिखाया जा रहा, बल्कि उनकी सोच, एकाग्रता, कल्पनाशक्ति और आत्मविश्वास को भी विकसित किया जा रहा है।
चित्रकला केवल शौक नहीं, व्यक्तित्व विकास का सशक्त माध्यम
विशेषज्ञों के अनुसार चित्रकला बच्चों के मस्तिष्क के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब कोई बच्चा चित्र बनाता है तो उसकी कल्पनाशक्ति, निर्णय लेने की क्षमता, स्मरण शक्ति और रचनात्मक सोच का विकास होता है। कला बच्चों को अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने का अवसर देती है, जिससे उनमें आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का निर्माण होता है।
कार्यशाला में भाग लेने वाले बच्चे रंगों के माध्यम से प्रकृति, संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक विषयों को अपने चित्रों में उकेर रहे हैं। इससे उनमें संवेदनशीलता और सामाजिक जागरूकता भी विकसित हो रही है।
संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायी यात्रा
प्रशिक्षक संदीप कुमार सारथी ने चर्चा के दौरान बताया कि वे पिछले 25 वर्षों से चित्रकला के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने अत्यंत साधारण और आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में रहकर इस कला को सीखा और निखारा है।
उन्होंने बताया कि स्कूली जीवन में छोटे-छोटे कागजों पर चित्र बनाकर अपनी कला यात्रा शुरू की थी। धीरे-धीरे चित्रकला के प्रति लगाव बढ़ता गया और आज उनकी कलाकृतियों की प्रदर्शनी दिल्ली, मुंबई, झांसी सहित देश के कई प्रमुख शहरों में लग चुकी है। इतना ही नहीं, उनकी कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिल चुकी है।
कटघोरा में खोलना चाहते हैं चित्रकला विद्यालय
संदीप सारथी का सपना है कि कटघोरा में एक ऐसा चित्रकला विद्यालय स्थापित किया जाए, जहां बच्चों को कला के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल सके। उनका मानना है कि यदि बच्चों को सही दिशा और प्रशिक्षण मिले तो वे कला को ही अपना व्यवसाय और रोजगार बना सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आज अनेक युवा रोजगार की तलाश में भटकते हैं, जबकि कला और रचनात्मकता के क्षेत्र में असीम संभावनाएं मौजूद हैं। चित्रकला, डिजाइनिंग, एनीमेशन, डिजिटल आर्ट, विज्ञापन और फाइन आर्ट्स जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अनेक अवसर उपलब्ध हैं।
कला से संस्कार, सृजन और आत्मनिर्भरता का संदेश
संस्कार भारती द्वारा आयोजित यह कार्यशाला केवल चित्रकला प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें सकारात्मक दिशा देने का अभियान भी है। कार्यशाला के माध्यम से बच्चों में अनुशासन, धैर्य, सृजनशीलता और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान का भाव विकसित हो रहा है।
कटघोरा में चल रही यह रंगों की पाठशाला आने वाले समय में न केवल कई प्रतिभाशाली कलाकार तैयार करेगी, बल्कि बच्चों को आत्मनिर्भर और रचनात्मक नागरिक बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह कार्यशाला साबित कर रही है कि रंगों से खेलते छोटे हाथ भविष्य के बड़े सपनों को भी आकार दे सकते हैं।


