सर्वमंगला मार्ग की नई सड़क पर उठने लगे सवाल: पहली बारिश में टिकेगी या फिर करोड़ों रुपये पानी में बह जाएंगे?



वर्षों बाद मिली सड़क, लेकिन जनता पूछ रही—गुणवत्ता की गारंटी कौन देगा?
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// कोरबा सर्वमंगला-कुसमुंडा मार्ग पर वर्षों से बने गड्ढों और जर्जर सड़क से परेशान लोगों को आखिरकार राहत मिलने की उम्मीद जगी है। सड़क का डामरीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। निर्माण एजेंसी द्वारा दावा किया जा रहा है कि सड़क आधुनिक तकनीक और बेहतर गुणवत्ता के साथ तैयार की गई है, लेकिन सड़क पूरी तरह तैयार होने से पहले ही इसकी गुणवत्ता और टिकाऊपन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कोरबा शहर में इससे पहले भी कई सड़कों का निर्माण बड़े दावों और भारी-भरकम बजट के साथ किया गया, लेकिन पहली ही बरसात में सड़कें उखड़ गईं, गड्ढों में तब्दील हो गईं और करोड़ों रुपये का काम सवालों के घेरे में आ गया। ऐसे में सर्वमंगला मार्ग की नई सड़क को लेकर भी जनता जवाब चाहती है कि आखिर यह सड़क कितने वर्षों तक टिकेगी?
पहली बारिश बनेगी असली परीक्षा
सड़क निर्माण कार्य लगभग पूरा होने की स्थिति में है, लेकिन जानकारों का मानना है कि किसी भी सड़क की वास्तविक गुणवत्ता का पता पहली बारिश के बाद ही चलता है। यदि सड़क की बेस लेयर, सबग्रेड, डामर की मोटाई और जल निकासी व्यवस्था मानकों के अनुरूप नहीं हुई तो कुछ ही महीनों में सड़क की परतें उखड़ने लगेंगी।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सड़क निर्माण के दौरान गुणवत्ता परीक्षण नियमित रूप से किए गए? क्या निर्माण सामग्री की जांच हुई? क्या सड़क की मोटाई और चौड़ाई निर्धारित मानकों के अनुरूप है? और सबसे महत्वपूर्ण—क्या निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई गई?
सड़क निर्माण में किन मानकों का पालन जरूरी?
सड़क विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी मुख्य मार्ग के निर्माण में कई तकनीकी मापदंडों का पालन अनिवार्य होता है। इनमें सड़क की बेस परत, जीएसबी (ग्रेन्युलर सब बेस), डब्ल्यूएमएम लेयर, बिटुमिनस लेयर की मोटाई, डामर की गुणवत्ता और जल निकासी व्यवस्था प्रमुख हैं।
यदि इन मानकों में कहीं भी समझौता किया जाता है तो सड़क कुछ समय बाद ही क्षतिग्रस्त होने लगती है। सड़क निर्माण के दौरान प्रत्येक परत की मोटाई मापी जाती है और लैब टेस्ट के माध्यम से गुणवत्ता सुनिश्चित की जाती है। जनता अब यह जानना चाहती है कि सर्वमंगला मार्ग में इन सभी प्रक्रियाओं का पालन हुआ या नहीं।
मिलीभगत की आशंका पर भी उठ रहे सवाल
क्षेत्र में चर्चा का विषय यह भी है कि यदि निर्माण कार्य में कहीं गुणवत्ता से समझौता हुआ तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा? लोगों का कहना है कि कई बार निर्माण एजेंसियों, निगरानी अधिकारियों और संबंधित विभागों के बीच कथित मिलीभगत के आरोप सामने आते रहे हैं, जिसके कारण घटिया निर्माण कार्य जनता के सामने आ जाते हैं।
हालांकि अभी तक सर्वमंगला मार्ग के निर्माण में किसी प्रकार की अनियमितता का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है, लेकिन जनता चाहती है कि सड़क निर्माण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो और गुणवत्ता संबंधी सभी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएं ताकि भविष्य में किसी प्रकार की शिकायत की गुंजाइश न रहे।
जनता की मांग—पहली बारिश के बाद हो गुणवत्ता की जांच
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क बन जाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता और टिकाऊपन सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। लोगों ने मांग की है कि पहली बारिश के बाद सड़क की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए और यदि कहीं भी निर्माण में खामियां पाई जाती हैं तो जिम्मेदार एजेंसी और अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
फिलहाल सड़क निर्माण पूरा होने के करीब है और लोगों को बेहतर यातायात सुविधा मिलने की उम्मीद है। लेकिन अब सबकी निगाहें आने वाले मानसून पर टिकी हैं। पहली तेज बारिश यह तय करेगी कि सर्वमंगला मार्ग वास्तव में विकास की नई पहचान बनेगा या फिर यह भी उन सड़कों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिनकी उम्र पहली बारिश से आगे नहीं बढ़ पाती।


