कटघोरा में कला साधना का शुभारंभ: संस्कार भारती की 10 दिवसीय चित्रकला कार्यशाला में निखरेगी बच्चों की प्रतिभा



रंगों के माध्यम से संवारे जाएंगे सपने, समर वेकेशन में बच्चों को मिलेगा कला, संस्कार और सृजन का संगम
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// कटघोरा। भारतीय संस्कृति, कला और सृजनात्मक प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संस्कार भारती इकाई कटघोरा द्वारा 10 दिवसीय चित्रकला प्रशिक्षण कार्यशाला का भव्य शुभारंभ किया गया। समर वेकेशन के दौरान आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण शिविर में बड़ी संख्या में बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता दर्ज कराई। कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों की रचनात्मक क्षमता को निखारना, कला के प्रति रुचि विकसित करना तथा उन्हें चित्रकला की तकनीकी बारीकियों से परिचित कराना है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. गोपाल बन गोस्वामी (संचालक, गोपाल मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल कटघोरा) तथा विशिष्ट अतिथि जे.एस. मानसर एवं पी.एन. योगी रहे। कार्यक्रम का संयोजन शिवशंकर जायसवाल ने किया, जबकि आयोजन समिति में श्रीमती हेमलता सिदार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यशाला के मुख्य प्रशिक्षक के रूप में संदीप कुमार सारथी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इसके पश्चात संस्कार भारती के सदस्यों द्वारा ध्येय गीत प्रस्तुत कर वातावरण को राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना से ओत-प्रोत कर दिया गया। मंचासीन अतिथियों का तिलक एवं पुष्प स्वागत कर सम्मान किया गया।
अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि डॉ. गोपाल बन गोस्वामी ने कहा कि संस्कार भारती द्वारा बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए किया जा रहा यह प्रयास अत्यंत प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा कि कला केवल शौक नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता और व्यक्तित्व विकास का सशक्त माध्यम भी बन सकती है। यदि बच्चे समर्पण और लगन के साथ चित्रकला सीखें तो भविष्य में इसे रोजगार और करियर के रूप में भी अपना सकते हैं।
विशिष्ट अतिथि जे.एस. मानसर ने कहा कि संस्कार भारती वर्षभर विभिन्न सांस्कृतिक और कलात्मक गतिविधियों का आयोजन करती है, जिनका उद्देश्य भारतीय कला एवं संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि चित्रकला जैसी विधाएं बच्चों की कल्पनाशक्ति को नई उड़ान देती हैं।
पी.एन. योगी ने प्रेरणादायी कविता के माध्यम से बच्चों में उत्साह का संचार किया। उनकी प्रस्तुति को बच्चों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराहा।
कार्यक्रम संयोजक शिवशंकर जायसवाल ने कहा कि यह प्रशिक्षण केवल चित्र बनाना सिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के भीतर धैर्य, एकाग्रता और रचनात्मक सोच विकसित करने का भी माध्यम है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से पूरे मनोयोग के साथ प्रशिक्षण का लाभ उठाने का आह्वान किया।
विद्यालय के प्राचार्य एम.एस. कवर ने कहा कि गर्मी की छुट्टियों में इस प्रकार के रचनात्मक कार्यक्रम बच्चों की प्रतिभा को नई दिशा देते हैं। ऐसे आयोजनों से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और उनमें सीखने की नई ऊर्जा का संचार होता है।
आयोजन समिति की सदस्य हेमलता सिदार ने बताया कि संस्कार भारती देशभर में कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए अनेक कार्यक्रम संचालित कर रही है। यह कार्यशाला भी उसी श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिससे बच्चे अवकाश के समय का सदुपयोग कर नई कला सीख सकेंगे।
मुख्य प्रशिक्षक संदीप कुमार सारथी ने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि कोई भी कला कठिन नहीं होती, आवश्यकता केवल सीखने की लगन और निरंतर अभ्यास की होती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशिक्षण के दौरान बच्चे चित्रकला की विभिन्न विधाओं में दक्षता हासिल करेंगे।
कार्यक्रम का सफल संचालन भवानी गोपाल ने किया।
इस अवसर पर रामकुमारी देवांगन, शिव दुबे, राजकुमार यादव, कन्हैया यादव, विनय सिंह, संतोष साहू, भारत भूषण साहू, आशीष शर्मा, देवेंद्र दीक्षित, प्रतिमा केवट, बिमलेश सिंह, मोमिन, मिलिंद अनंत, बसंती कवर, हसीना बाई, डॉ. भूपेंद्र गुप्ता, भूपेंद्र वर्मा, त्रिलोक अग्रवाल, गीता साहू, प्रिया दुबे, अभिषेक कौशिक, मो. मोबिन, इनायत अली, प्रशांत अग्रवाल, इंद्रमोहन जायसवाल, रामकुमार पटेल एवं दुर्गेश साहू सहित बड़ी संख्या में अभिभावक, गणमान्य नागरिक एवं बच्चे उपस्थित रहे।
कार्यशाला के पहले दिन बच्चों में सीखने का विशेष उत्साह देखने को मिला। आने वाले दस दिनों में प्रतिभागियों को चित्रकला की विभिन्न तकनीकों, रंग संयोजन, रेखांकन और रचनात्मक अभिव्यक्ति का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
“संस्कार भारती का अभिनव प्रयास: समर वेकेशन में बच्चों को मिल रहा कला, संस्कार और आत्मविश्वास का अनूठा प्रशिक्षण”


