प्यासा गौरबोरा: 6 माह से बंद हैंडपंप, आधा किलोमीटर दूर पानी ढोने को मजबूर ग्रामीण, प्रशासन मौन!



नल-जल योजना बनी शोपीस, सिंटेक्स टंकी खड़ी लेकिन बूंदभर पानी नहीं; 23 परिवारों का सब्र टूटा, ग्रामीणों ने उठाए गंभीर सवाल
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// कोरबा। एक ओर सरकार हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर कोरबा जिले की ग्राम पंचायत माखुरपानी के आश्रित ग्राम गौरबोरा में ग्रामीण पिछले कई महीनों से भीषण पेयजल संकट झेलने को मजबूर हैं। गांव के ऊपर मोहल्ला में स्थित एकमात्र हैंडपंप लगभग पांच से छह माह से खराब पड़ा हुआ है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और पंचायत प्रशासन अब तक इसकी मरम्मत तक नहीं करा पाए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार हैंडपंप में पाइप की खराबी के कारण पानी निकलना बंद हो गया है। इस हैंडपंप पर करीब 22 से 23 परिवारों की निर्भरता थी, लेकिन महीनों से खराब पड़े रहने के कारण लोगों को पीने के पानी के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को रोजाना आधा किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर स्कूल परिसर के पास स्थित जलस्रोत से पानी लाना पड़ रहा है।
गर्मी में पानी के लिए संघर्ष, जिम्मेदारों को नहीं दिख रही परेशानी

ग्रामीणों का कहना है कि भीषण गर्मी के इस दौर में पेयजल जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कई बार शिकायत और मांग करने के बावजूद न तो पंचायत ने गंभीरता दिखाई और न ही संबंधित विभाग ने कोई ठोस पहल की। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है।
गांव के लोगों का कहना है कि जब हैंडपंप खराब हुआ था, तब उम्मीद थी कि कुछ दिनों में मरम्मत हो जाएगी, लेकिन अब छह महीने बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर ग्रामीण क्षेत्रों की मूलभूत समस्याओं के प्रति जिम्मेदार विभाग कितने संवेदनशील हैं।
नल-जल योजना भी बनी मजाक, फाउंडेशन और टंकी तक सिमटा विकास
ग्रामीणों ने नल-जल योजना की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गांव में योजना के तहत केवल फाउंडेशन बनाकर और सिंटेक्स टंकी रखकर काम अधूरा छोड़ दिया गया। पाइपलाइन, जल आपूर्ति और अन्य आवश्यक कार्य आज तक पूरे नहीं किए गए।
ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित ठेकेदार की लापरवाही के कारण योजना अधर में लटकी हुई है। करोड़ों रुपये की योजनाओं का प्रचार तो किया जाता है, लेकिन धरातल पर ग्रामीणों को उसका लाभ नहीं मिल रहा। गांव में आज भी लोग बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं।
आखिर कब जागेगा प्रशासन?
गौरबोरा के ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि खराब हैंडपंप को तत्काल दुरुस्त कराया जाए तथा अधूरी पड़ी नल-जल योजना को शीघ्र पूरा कर नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
बड़ा सवाल
जब सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट खत्म करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तो फिर गौरबोरा जैसे गांवों में लोग आज भी पानी के लिए दर-दर क्यों भटक रहे हैं?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता और ठेकेदारों की लापरवाही का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ेगा?
क्या केवल कागजों में योजनाएं पूरी दिखाकर जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाएंगे?
गौरबोरा की प्यास अब केवल पानी की नहीं, बल्कि जवाबदेही और संवेदनशील प्रशासन की भी है। ग्रामीणों को इंतजार है कि आखिर उनकी यह मूलभूत समस्या कब दूर होगी और कब उनके घरों तक पानी की धार पहुंचेगी।
“छह महीने से खराब हैंडपंप, अधूरी नल-जल योजना और पानी के लिए रोजाना संघर्ष—गौरबोरा के ग्रामीणों का फूटा गुस्सा”


