May 28, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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कोरबा में बचाई जा रही भारत की हजारों साल पुरानी ज्ञान धरोहर, “ज्ञानभारतम् मिशन” बना सांस्कृतिक चेतना का महाअभियान प्राचीन पाण्डुलिपियों के संरक्षण को लेकर जागा समाज, सतीश प्रकाश सिंह बोले — “भारतीय ज्ञान परंपरा को बचाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी” 75 वर्ष से अधिक पुरानी दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण हेतु कोरबा में तेज हुआ राष्ट्रीय अभियान कोरबा। भारतीय संस्कृति, सभ्यता और प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहरों को संरक्षित करने की दिशा में कोरबा जिले में एक ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व का अभियान निरंतर गति पकड़ रहा है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित “ज्ञानभारतम् मिशन” राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान अब केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक अस्मिता को बचाने का जनआंदोलन बनता जा रहा है। कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में जिलेभर में संचालित इस महत्वाकांक्षी अभियान के अंतर्गत 26 मई 2026 को अग्रसेन कन्या महाविद्यालय, कोरबा में एक महत्वपूर्ण जन-जागरूकता बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों, शिक्षाविदों, स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों एवं युवाओं की प्रभावशाली सहभागिता देखने को मिली। कार्यक्रम में “ज्ञानभारतम् मिशन” कोरबा के जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह ने अभियान की आवश्यकता, उद्देश्य एवं इसके राष्ट्रीय महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की प्राचीन पाण्डुलिपियाँ केवल कागज़ या ताड़पत्र नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय ज्ञान-विज्ञान, संस्कृति, दर्शन, अध्यात्म और ऐतिहासिक चेतना की जीवित धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियों का समय रहते संरक्षण और डिजिटलीकरण नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियाँ भारत की मूल ज्ञान परंपरा से वंचित हो जाएंगी। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से इस अभियान से जुड़ने और अपनी पारिवारिक, सामाजिक या धार्मिक संस्थाओं में सुरक्षित प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथों एवं दस्तावेजों की जानकारी साझा करने की अपील की। दुर्लभ धरोहरों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने का राष्ट्रीय प्रयास जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह ने बताया कि “ज्ञानभारतम् मिशन” के अंतर्गत 75 वर्ष से अधिक पुराने हस्तलिखित अभिलेखों, ताड़पत्र, भोजपत्र, प्राचीन पोथियों, धार्मिक ग्रंथों, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व के दस्तावेजों का सर्वेक्षण कर उनका डिजिटलीकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल संरक्षण का कार्य नहीं, बल्कि भारत की विलुप्त होती ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने का राष्ट्रीय संकल्प है। उन्होंने कहा कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है और कोरबा जिले में इसे जन-जन तक पहुंचाने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान से जुड़ने वालों को मिलेगा सम्मान सतीश प्रकाश सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि अभियान के अंतर्गत दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण, सर्वेक्षण और डिजिटलीकरण में सहयोग करने वाले संरक्षकों, सर्वेक्षणकर्ताओं, स्वयंसेवकों एवं समाजसेवियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया जाएगा। उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से आगे आने का आह्वान करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को बचाने का यह अभियान केवल इतिहास नहीं, बल्कि आने वाले भारत के भविष्य को सुरक्षित करने का प्रयास है। बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों और समाजसेवियों ने रखे विचार बैठक में रेडक्रॉस कोरबा के अध्यक्ष रामसिंह अग्रवाल, कमला नेहरू महाविद्यालय शिक्षण समिति के अध्यक्ष किशोर शर्मा, अग्रसेन महाविद्यालय शिक्षण समिति के अध्यक्ष गोपाल अग्रवाल तथा वरिष्ठ पत्रकार गेंदलाल शुक्ल ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए “ज्ञानभारतम् मिशन” को भारतीय संस्कृति संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण पहल बताया। कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय की “ज्ञानभारतम्” प्रभारी सहायक प्राध्यापक नूपुर अग्रवाल ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन अग्रसेन कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार झा द्वारा किया गया। शिक्षकों, समाज प्रतिनिधियों और युवाओं की रही प्रभावशाली उपस्थिति बैठक में सहायक प्राध्यापक डॉ. आसमां सिंह, डॉ. मंदाकिनी चंद्रा, डॉ. शकुंतला जायसवाल, डॉ. भारती कुलदीप, डॉ. आसीबाला गुप्ता, रमिता दास, मंजीत कौर लाम्बा, डॉ. पियाधार सिंह, डॉ. प्रशांत सिंह राजपूत, अनिल अग्रवाल (अग्रवाल सभा मीडिया प्रभारी), नानक सिंह राजपूत सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यगण, “ज्ञानभारतम् प्रभारी” सहायक प्राध्यापक, “ज्ञानभारतम् दूत” युवा टीम, वालंटियर्स एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। “कोरबा से उठी सांस्कृतिक चेतना की अलख” बैठक के दौरान यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि भारतीय संस्कृति और प्राचीन ज्ञान परंपरा की रक्षा केवल सरकार का नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है। “ज्ञानभारतम् मिशन” के माध्यम से कोरबा जिले में जो सांस्कृतिक चेतना जागृत हुई है, वह आने वाले समय में भारतीय विरासत संरक्षण की मिसाल बन सकती है।

 

 

प्राचीन पाण्डुलिपियों के संरक्षण को लेकर जागा समाज, सतीश प्रकाश सिंह बोले — “भारतीय ज्ञान परंपरा को बचाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी”
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**//  कोरबा 75 वर्ष से अधिक पुरानी दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण हेतु कोरबा में तेज हुआ राष्ट्रीय अभियान
कोरबा। भारतीय संस्कृति, सभ्यता और प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहरों को संरक्षित करने की दिशा में कोरबा जिले में एक ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व का अभियान निरंतर गति पकड़ रहा है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित “ज्ञानभारतम् मिशन” राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान अब केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक अस्मिता को बचाने का जनआंदोलन बनता जा रहा है।
कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में जिलेभर में संचालित इस महत्वाकांक्षी अभियान के अंतर्गत 26 मई 2026 को अग्रसेन कन्या महाविद्यालय, कोरबा में एक महत्वपूर्ण जन-जागरूकता बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों, शिक्षाविदों, स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों एवं युवाओं की प्रभावशाली सहभागिता देखने को मिली।

 

 

कार्यक्रम में “ज्ञानभारतम् मिशन” कोरबा के जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह ने अभियान की आवश्यकता, उद्देश्य एवं इसके राष्ट्रीय महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की प्राचीन पाण्डुलिपियाँ केवल कागज़ या ताड़पत्र नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय ज्ञान-विज्ञान, संस्कृति, दर्शन, अध्यात्म और ऐतिहासिक चेतना की जीवित धरोहर हैं।
उन्होंने कहा कि यदि इन दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियों का समय रहते संरक्षण और डिजिटलीकरण नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियाँ भारत की मूल ज्ञान परंपरा से वंचित हो जाएंगी। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से इस अभियान से जुड़ने और अपनी पारिवारिक, सामाजिक या धार्मिक संस्थाओं में सुरक्षित प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथों एवं दस्तावेजों की जानकारी साझा करने की अपील की।
दुर्लभ धरोहरों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने का राष्ट्रीय प्रयास
जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह ने बताया कि “ज्ञानभारतम् मिशन” के अंतर्गत 75 वर्ष से अधिक पुराने हस्तलिखित अभिलेखों, ताड़पत्र, भोजपत्र, प्राचीन पोथियों, धार्मिक ग्रंथों, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व के दस्तावेजों का सर्वेक्षण कर उनका डिजिटलीकरण किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह केवल संरक्षण का कार्य नहीं, बल्कि भारत की विलुप्त होती ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने का राष्ट्रीय संकल्प है। उन्होंने कहा कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है और कोरबा जिले में इसे जन-जन तक पहुंचाने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
अभियान से जुड़ने वालों को मिलेगा सम्मान
सतीश प्रकाश सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि अभियान के अंतर्गत दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण, सर्वेक्षण और डिजिटलीकरण में सहयोग करने वाले संरक्षकों, सर्वेक्षणकर्ताओं, स्वयंसेवकों एवं समाजसेवियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया जाएगा।
उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से आगे आने का आह्वान करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को बचाने का यह अभियान केवल इतिहास नहीं, बल्कि आने वाले भारत के भविष्य को सुरक्षित करने का प्रयास है।
बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों और समाजसेवियों ने रखे विचार
बैठक में रेडक्रॉस कोरबा के अध्यक्ष रामसिंह अग्रवाल, कमला नेहरू महाविद्यालय शिक्षण समिति के अध्यक्ष किशोर शर्मा, अग्रसेन महाविद्यालय शिक्षण समिति के अध्यक्ष गोपाल अग्रवाल तथा वरिष्ठ पत्रकार गेंदलाल शुक्ल ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए “ज्ञानभारतम् मिशन” को भारतीय संस्कृति संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण पहल बताया।
कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय की “ज्ञानभारतम्” प्रभारी सहायक प्राध्यापक नूपुर अग्रवाल ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन अग्रसेन कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार झा द्वारा किया गया।
शिक्षकों, समाज प्रतिनिधियों और युवाओं की रही प्रभावशाली उपस्थिति
बैठक में सहायक प्राध्यापक डॉ. आसमां सिंह, डॉ. मंदाकिनी चंद्रा, डॉ. शकुंतला जायसवाल, डॉ. भारती कुलदीप, डॉ. आसीबाला गुप्ता, रमिता दास, मंजीत कौर लाम्बा, डॉ. पियाधार सिंह, डॉ. प्रशांत सिंह राजपूत, अनिल अग्रवाल (अग्रवाल सभा मीडिया प्रभारी), नानक सिंह राजपूत सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यगण, “ज्ञानभारतम् प्रभारी” सहायक प्राध्यापक, “ज्ञानभारतम् दूत” युवा टीम, वालंटियर्स एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
“कोरबा से उठी सांस्कृतिक चेतना की अलख”
बैठक के दौरान यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि भारतीय संस्कृति और प्राचीन ज्ञान परंपरा की रक्षा केवल सरकार का नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है। “ज्ञानभारतम् मिशन” के माध्यम से कोरबा जिले में जो सांस्कृतिक चेतना जागृत हुई है, वह आने वाले समय में भारतीय विरासत संरक्षण की मिसाल बन सकती है।

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