लाल किला बना जनजातीय अस्मिता का महासंगम : कोरबा के 350 समाजजनों ने दिल्ली में दिखाई एकता और संस्कृति की ताकत



डिलिस्टिंग हुंकार रैली में झांझ, पारंपरिक नृत्य और जनजातीय संस्कृति की गूंज से मंत्रमुग्ध हुआ दिल्ली का लाल किला
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **//**// नई दिल्ली/कोरबा, 25 मई 2026
देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक Red Fort रविवार को जनजातीय एकता, संस्कृति और अधिकारों की बुलंद आवाज का साक्षी बना। जनजाति सुरक्षा मंच के तत्वावधान में आयोजित विशाल डिलिस्टिंग हुंकार रैली एवं सांस्कृतिक समागम में देशभर के विभिन्न राज्यों और वनांचल क्षेत्रों से हजारों की संख्या में जनजातीय समाज के लोग शामिल हुए। भीषण गर्मी के बावजूद समाजजनों का उत्साह, अनुशासन और जनजातीय अस्मिता के प्रति समर्पण देखने लायक रहा।
इस ऐतिहासिक आयोजन में छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से लगभग 350 समाजजन दिल्ली पहुंचे। लंबी रेल यात्रा और निजी खर्च के बावजूद समाजजनों ने जिस उत्साह के साथ भागीदारी निभाई, उसने जनजातीय समाज की एकजुटता और जागरूकता का मजबूत संदेश दिया।
कार्यक्रम में देश के गृह मंत्री Amit Shah मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, वहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai की उपस्थिति ने समाजजनों का उत्साह और बढ़ा दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ जनजातीय नेता Ganesh Ram Bhagat ने की। मंच से जनजातीय संस्कृति, संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा और जनजातीय पहचान से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार रखे गए।

कोरबा की झांझ ने दिल्ली में बिखेरा जलवा
रैली और सांस्कृतिक समागम के दौरान कोरबा जिले से पहुंचे समाजजनों ने अपनी पारंपरिक झांझ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि अन्य राज्यों से आए लोग मंत्रमुग्ध होकर देखते रह गए। पारंपरिक वेशभूषा, जनजातीय नृत्य और लोक धुनों से पूरा लाल किला परिसर गूंज उठा।
कोरबा के युवाओं और कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से यह साबित कर दिया कि जनजातीय संस्कृति केवल परंपरा नहीं, बल्कि समाज की जीवंत पहचान है। कई लोगों ने मोबाइल कैमरों में इन प्रस्तुतियों को कैद किया और सोशल मीडिया पर साझा किया।
“अपनी पहचान – अपना अधिकार” के नारों से गूंजा दिल्ली
कार्यक्रम के दौरान युवा पूरे उत्साह के साथ “जनजाति एकता जिंदाबाद”, “अपनी पहचान – अपना अधिकार” और “समाज की सुरक्षा, भविष्य की रक्षा” जैसे नारों के साथ शामिल हुए। माताओं, बहनों, युवाओं और बुजुर्गों ने एक स्वर में समाज की एकता और अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया।
कोरबा जिले से पहुंचे कई समाजजन पहली बार दिल्ली पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि लाल किला जैसे ऐतिहासिक स्थल पर आयोजित इतने बड़े आयोजन का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।
समाज की सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की आवाज बना आयोजन
समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि जनजातीय समाज सदियों से प्रकृति, संस्कृति और परंपराओं का संरक्षक रहा है। आज आवश्यकता है कि समाज शिक्षा, संगठन और जागरूकता के माध्यम से अपने अधिकारों के प्रति सजग बने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत सामाजिक आधार तैयार करे।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल रैली नहीं, बल्कि समाज की अस्मिता, अस्तित्व और भविष्य की सुरक्षा के लिए उठी एक मजबूत सामूहिक आवाज है।
अनुशासन और संगठन का दिया संदेश
कोरबा से पहुंचे समाजजनों ने पूरी यात्रा के दौरान अनुशासन, सहयोग और संगठन की मिसाल पेश की। युवाओं ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से कार्यक्रम की जानकारी व्यापक स्तर तक पहुंचाई। समाज के लोगों ने एक-दूसरे का सहयोग करते हुए सामूहिकता और सामाजिक एकता का परिचय दिया।
इस विशाल आयोजन को सफल बनाने में Vanvasi Kalyan Ashram के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कोरबा जिले से बीरबल भैया जी, दीपक जी, रेणुका राठिया, रामेश्वर राठिया सहित अनेक समाजसेवियों का विशेष सहयोग रहा, जिसके लिए समाजजनों ने आभार व्यक्त किया।
यह डिलिस्टिंग हुंकार रैली एवं सांस्कृतिक समागम जनजातीय समाज की संस्कृति, एकता और अधिकारों की बुलंद आवाज बनकर उभरा, जिसने यह संदेश दिया कि जब समाज एकजुट होकर आगे बढ़ता है, तो उसकी आवाज पूरे देश में गूंजती है।


