March 13, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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बालको का वेदांता स्किल स्कूल बना महिलाओं की सफलता की पाठशाला — कौशल प्रशिक्षण से बदल रही हजारों बेटियों की जिंदगी

 

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ***//**  कोरबा। छत्तीसगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और इस सकारात्मक बदलाव के पीछे बालको का वेदांता स्किल स्कूल एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पहले जहां ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की कई युवतियों के पास रोजगार के सीमित अवसर होते थे, वहीं अब वे तकनीकी कार्यों, फैक्ट्रियों, हॉस्पिटैलिटी सेवाओं और उभरते तकनीकी क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं।
वेदांता स्किल स्कूल में महिलाओं को आधुनिक कौशल प्रशिक्षण के साथ उद्योग से जुड़ा व्यावहारिक अनुभव दिया जाता है, जिससे वे आत्मविश्वास के साथ नौकरी के लिए तैयार हो रही हैं। यह पहल केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उनके परिवारों के भविष्य को भी संवार रही है।
संघर्ष से सफलता तक पूजा की कहानी
पूजा सोतकर की कहानी इस बदलाव की प्रेरणादायक मिसाल है। कम उम्र में माता-पिता को खोने के बाद वे कोरबा के एक बालिका आश्रय में पली-बढ़ीं, लेकिन उनके अंदर सीखने और आगे बढ़ने का जज़्बा हमेशा बना रहा। इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के प्रति रुचि के कारण उन्होंने वेदांता स्किल स्कूल से मोबाइल फोन हार्डवेयर रिपेयर टेक्नीशियन का प्रशिक्षण लिया।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें बेंगलुरु की टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स में ऑपरेटर के रूप में नौकरी मिली, जहां उन्हें सालाना दो लाख रुपये से अधिक वेतन के साथ अन्य सुविधाएं भी मिल रही हैं। पूजा कहती हैं कि यह प्रशिक्षण उनके लिए आत्मनिर्भर बनने का रास्ता साबित हुआ।

 

काजल सांडे ने हासिल किया तकनीकी आत्मविश्वास
कोरबा के गोढ़ी गांव की काजल सांडे भी इस पहल से लाभान्वित हुई हैं। आईटीआई इलेक्ट्रिकल करने के बाद उन्होंने वेदांता स्किल स्कूल से तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त किया। वे बताती हैं कि यहां उन्हें इलेक्ट्रिकल सिस्टम, सुरक्षा मानकों और तकनीकी उपकरणों के बारे में व्यावहारिक ज्ञान मिला, जिससे उद्योग में काम करने का आत्मविश्वास बढ़ा।
प्रशिक्षण के बाद उन्हें बालको में अप्रेंटिसशिप का अवसर मिला और आज वे सुपरवाइजरी जिम्मेदारियां निभा रही हैं, जो कभी उनके लिए एक सपना हुआ करता था।
हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में मनीषा की नई उड़ान
मनीषा रात्रे के लिए यह प्रशिक्षण हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में नए अवसर लेकर आया। वे बताती हैं कि वेदांता स्किल स्कूल में फूड एंड बेवरेज सर्विस की ट्रेनिंग ने उन्हें इस क्षेत्र में काम करने का आत्मविश्वास दिया। आज वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं और अपनी छोटी बहन की पढ़ाई में भी सहयोग कर रही हैं।
ग्रीन एनर्जी सेक्टर में भी खुल रहे नए अवसर
जांजगीर-चांपा की पूर्णिमा रात्रे बताती हैं कि स्किल ट्रेनिंग से ग्रीन एनर्जी क्षेत्र में भी युवाओं के लिए नए अवसर बन रहे हैं। उन्होंने सोलर पीवी इंस्टॉलर प्रोग्राम के तहत सोलर पैनल इंस्टॉलेशन और इलेक्ट्रिकल सिस्टम की बुनियादी जानकारी प्राप्त की।
इस प्रशिक्षण के बाद उन्हें बेंगलुरु की फॉक्सकॉन प्रिसिजन इंजीनियरिंग में प्लेसमेंट मिला है, जो उनके करियर की शानदार शुरुआत है।
कौशल के साथ बदल रही समाज की सोच
वेदांता स्किल स्कूल की इस पहल का प्रभाव केवल रोजगार तक सीमित नहीं है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की युवा महिलाएं अब देश की प्रमुख कंपनियों में काम कर रही हैं और समाज की सोच में भी सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। विभिन्न कार्यस्थलों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए ये महिलाएं यह साबित कर रही हैं कि कौशल, अवसर और दृढ़ संकल्प मिलकर भारत के कार्यबल का भविष्य बदल सकते हैं।
14 हजार से अधिक युवाओं को मिल चुका है प्रशिक्षण
वेदांता स्किल स्कूल भारत सरकार द्वारा पांच सितारा रेटिंग प्राप्त स्मार्ट सेंटर है, जिसे नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनएसडीसी) और सेक्टर स्किल्स काउंसिल (एसएससी) से मान्यता प्राप्त है। वर्ष 2010 से अब तक यहां 14 हजार से अधिक ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं शामिल हैं।
सात ट्रेड्स में दिया जाता है निःशुल्क आवासीय प्रशिक्षण
इस संस्थान में सात प्रमुख ट्रेड्स में निःशुल्क आवासीय प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, जिनमें
सिलाई मशीन ऑपरेटर
इलेक्ट्रिशियन
वेल्डिंग
हॉस्पिटैलिटी
फिटर एंड अलाइनमेंट
सोलर पीवी टेक्नीशियन
मोबाइल रिपेयर ऑपरेटर
शामिल हैं।
प्रशिक्षण के साथ-साथ संचार कौशल, कार्यस्थल सुरक्षा, कानूनी अधिकार, महवारी स्वास्थ्य और बालको के अनुभवी कर्मचारियों द्वारा मेंटरशिप भी प्रदान की जाती है, ताकि प्रशिक्षु देशभर की कंपनियों में रोजगार के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें।
इस तरह वेदांता स्किल स्कूल न केवल युवाओं को रोजगार दिलाने में मदद कर रहा है, बल्कि हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उनके सपनों को नई उड़ान दे रहा है।

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