January 21, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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भक्ति, आस्था और उल्लास के संग निकली कलश यात्रा, 23 जनवरी को एनटीपीसी स्थित श्री शिव हनुमान मंदिर में होगा श्री राधा-कृष्ण जी का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव

 

त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** कोरबा  धार्मिक आस्था, भक्ति और उल्लास के वातावरण में एनटीपीसी स्थित श्री शिव हनुमान मंदिर परिसर में श्री राधा-कृष्ण जी के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की तैयारियों का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ किया गया। श्री शिव हनुमान मंदिर समिति, एनटीपीसी के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में क्षेत्रवासियों की आस्था देखते ही बन रही थी। उल्लेखनीय है कि दिनांक 23 जनवरी 2026 को विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्री राधा-कृष्ण जी की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न होगी।

 

 

 

प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के उपलक्ष्य में निकाली गई कलश यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला-पुरुषों ने सहभागिता की। भक्तिमय जयकारों — “जय श्री लक्ष्मी नारायण जी”, “जय श्री राधे कृष्ण जी” के गगनभेदी उद्घोष के साथ कलश यात्रा ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। कलश यात्रा का समापन मंदिर परिसर में हुआ, जहाँ वातावरण पूर्णतः भक्तिरस में डूबा नजर आया।

 

 

कलश यात्रा के समापन पश्चात मंदिर में भगवान भोलेनाथ, मां गौरी एवं बजरंगबली की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने समस्त क्षेत्रवासियों के सुख, समृद्धि, शांति एवं उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। पूजन कार्यक्रम में श्रद्धा, अनुशासन और धार्मिक मर्यादाओं का विशेष ध्यान रखा गया।
इस अवसर पर मंदिर समिति के संरक्षक श्री कौशल देवांगन जी, श्री भुनेश्वर दुग्गल जी, श्री मनोज लहरे जी, समिति अध्यक्ष श्री सुरेश अग्रवाल जी, उपाध्यक्ष श्री अंजय अग्रवाल जी, पार्षद श्री नरेंद्र देवांगन जी सहित समिति के महिला सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे क्षेत्र की धार्मिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताया।
समिति पदाधिकारियों ने जानकारी दी कि 23 जनवरी 2026 को होने वाले श्री राधा-कृष्ण जी के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में विधिवत हवन-पूजन, भजन-कीर्तन एवं विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे, जिसमें क्षेत्र के श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होने का आग्रह किया गया है।
यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज में सद्भाव, आस्था और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने वाला एक पावन अवसर भी सिद्ध हो रहा है।

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