जब कोरबा बोलेगा – “मां तुझे सलाम” तिरंगे के साए में तीन दिन, देशभक्ति की धड़कनों के साथ धड़केगा शहर






20 वर्षों की परंपरा, पहली बार तीन दिवसीय राष्ट्र आराधना
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** कोरबा जब तिरंगा लहराता है, जब राष्ट्रगान की गूंज दिलों को छूती है और जब हर सांस में देशप्रेम उतर आता है—
तब केवल एक दिन नहीं, पूरा शहर राष्ट्रोत्सव बन जाता है।
ऐसा ही दृश्य इस बार कोरबा में देखने को मिलेगा, जब शनिवार से बहुप्रतीक्षित ‘मां तुझे सलाम’ कार्यक्रम का शुभारंभ होगा, जो तीन दिनों तक देशभक्ति, संस्कृति और एकता का उत्सव बनकर चलेगा।
20 साल की भावना, अब तीन दिन की राष्ट्र आराधना
इस वर्ष ‘मां तुझे सलाम’ आयोजन अपने 20वें गौरवशाली वर्ष में प्रवेश कर रहा है। दो दशकों से देशप्रेम की अलख जगाता यह कार्यक्रम इस बार पहली बार तीन दिवसीय महोत्सव के रूप में आयोजित किया जा रहा है, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक क्षण है।

हर उम्र, हर वर्ग के लिए देशभक्ति का मंच
तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में
🇮🇳 देशभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां,
🎤 युवाओं की प्रतिभा को मंच देने वाली प्रतियोगिताएं,
🎨 कला, शिक्षा, खेल और समाज सेवा से जुड़े कार्यक्रम,
🛍️ आकर्षक ट्रेड फेयर
आयोजित किए जाएंगे, जिससे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर नागरिक राष्ट्रप्रेम के रंग में रंग सके।
26 जनवरी को भावनाओं का शिखर, राष्ट्रगान के साथ समापन
गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को आयोजन अपने चरम पर पहुंचेगा। देशभक्ति गीतों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और तिरंगे की गरिमा के बीच कार्यक्रम का भव्य समापन होगा, जब पूरा कोरबा एक स्वर में राष्ट्रगान गुनगुनाएगा।
तैयारियों में झलक रहा देशप्रेम
आयोजन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। आयोजन स्थल को तिरंगे की थीम में सजाया जा रहा है। मंच, स्टॉल, दर्शक व्यवस्था और व्यवस्थापन को पूरी संवेदनशीलता और गरिमा के साथ अंतिम रूप दिया जा रहा है। शहर में हर ओर उत्साह, गर्व और प्रतीक्षा का भाव देखा जा रहा है।
नागरिकों की भावना – यह केवल आयोजन नहीं, यह संकल्प है
शहरवासियों का कहना है कि ‘मां तुझे सलाम’ सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि
➡️ राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता,
➡️ शहीदों को नमन,
➡️ और आने वाली पीढ़ियों में देशप्रेम भरने का संकल्प है।
कोरबा बनेगा राष्ट्रप्रेम की राजधानी
अब सबकी निगाहें शनिवार से शुरू होने वाले इस आयोजन पर टिकी हैं, जो इस गणतंत्र दिवस सप्ताहांत को मनोरंजन नहीं, बल्कि राष्ट्र आराधना में बदल देगा।
तीन दिन… एक भावना… एक स्वर—
“मां तुझे सलाम”





