24 घंटे अंधेरे में डूबे एक दर्जन गांव, 11 केवी लाइन फॉल्ट खोजने में नाकाम रहा विद्युत विभाग






फोन नहीं उठे, जवाब नहीं मिला – मड़वारानी क्षेत्र में बिजली विभाग की घोर लापरवाही उजागर
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//**कोरबा जिले में विद्युत व्यवस्था का हाल दिन-ब-दिन बदतर होता जा रहा है। शहर के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ताजा मामला मड़वारानी और उसके आसपास के एक दर्जन गांवों का है, जहां जर्वे नहर के पास 11 केवी के दो तार आपस में सट जाने से शनिवार शाम 6 बजे बिजली गुल हो गई, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इस मामूली तकनीकी खामी को दुरुस्त करने में विभाग को पूरे 24 घंटे लग गए।
शनिवार शाम से लेकर रविवार शाम करीब 5 बजे तक मड़वारानी सहित सोहागपुर सब स्टेशन अंतर्गत आने वाले ग्राम खरहरकुड़ा, रोगदा, परसाभाटा, जर्वे, सलवाडेरा, नराईडीह, घांठाद्वारी, दमखांचा, भेलवागुडी, कराईनारा, सीधापाठ और भंवरखोल जैसे गांव अंधेरे में डूबे रहे। करीब 21 से 24 घंटे तक हजारों ग्रामीण बिना बिजली के रहने को मजबूर रहे।
❗ फॉल्ट खोजने में ही निकल गया विभाग का दम
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी मर्यादित के अंतर्गत बरपाली-जर्वे क्षेत्र में 11 केवी लाइन के दो तार आपस में सटने से पूरी लाइन में तकनीकी खराबी आ गई थी, लेकिन सवाल यह है कि इतनी सामान्य खराबी को ढूंढने और सुधारने में पूरी रात और अगला दिन क्यों लग गया?
ठंड के मौसम में, जब बिजली की मांग बेहद कम रहती है, तब भी यदि विभाग 24 घंटे में लाइन चालू नहीं कर पा रहा है, तो आने वाली भीषण गर्मी में हालात कितने भयावह होंगे, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
📞 न फोन उठा, न जवाब मिला
बिजली गुल होते ही ग्रामीणों ने स्थानीय बिजली कर्मचारियों और जेई टोप्पो सहित अधिकारियों को लगातार फोन किए, लेकिन किसी ने फोन उठाना तक जरूरी नहीं समझा।
ना तो ग्रामीणों को यह बताया गया कि बिजली क्यों बंद हुई है और ना ही यह जानकारी दी गई कि आपूर्ति कब तक बहाल होगी। इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये से ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी गई।
🐍 अंधेरे में बढ़ा जान का खतरा
बिजली गुल रहने के कारण ग्रामीणों को रातभर अंधेरे में रहना पड़ा। इन दिनों क्षेत्र में सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है, ऐसे में बिजली गुल होना सीधे तौर पर लोगों की जान को जोखिम में डालने जैसा है।
इसके बावजूद बिजली विभाग के कर्मचारियों द्वारा समय रहते लाइन सुधारने का कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया।
⚠️ अभी ठंड में ये हाल, तो गर्मी में क्या होगा?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि ठंड के मौसम में यह हाल है, तो अप्रैल-मई की भीषण गर्मी में, जब बिजली की मांग चरम पर होगी, तब स्थिति और भी भयावह हो जाएगी।
ग्रामीण क्षेत्र ही नहीं, बल्कि शहर में भी लगातार बिजली की आंख-मिचौली आम होती जा रही है।
🔥 चेतावनी है यह घटना
यह पूरी घटना विद्युत विभाग की लापरवाही, उदासीनता और कमजोर व्यवस्था की खुली पोल खोलती है।
यदि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी समय रहते व्यवस्था सुधारने को गंभीर नहीं हुए, तो आने वाले दिनों में जनता का आक्रोश और भी उग्र हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी बिजली विभाग की होगी।
जनता पूछ रही है —
आखिर कब सुधरेगी कोरबा जिले की विद्युत व्यवस्था?
और कब तक ग्रामीणों को इस लापरवाही की कीमत अंधेरे में रहकर चुकानी पड़ेगी?





