भाजपा में संगठनात्मक संवाद से कांग्रेस में खलबली, परिवारवाद की घुटन में तड़प रही कांग्रेस : डॉ. विजय शंकर मिश्रा






भाजपा परिवार है, कांग्रेस दरबार—इसी फर्क से बौखलाई कांग्रेस
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** रायपुर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से छत्तीसगढ़ भाजपा नेताओं की लगातार हो रही मुलाकातों को लेकर कांग्रेस नेताओं द्वारा दिए जा रहे बयानों पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विजय शंकर मिश्रा ने कांग्रेस पर करारा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा में शीर्ष नेतृत्व से संवाद और मुलाकात संगठनात्मक संस्कृति का हिस्सा है, जबकि कांग्रेस परिवारवाद और दरबारी राजनीति में जकड़ी हुई पार्टी है। इसी मानसिक कुंठा और आत्मग्लानि के कारण कांग्रेस नेता अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि भाजपा एक राजनीतिक दल होने से पहले एक वैचारिक परिवार है, जहां संगठन के मुखिया से मिलना सहज, स्वाभाविक और सम्मानजनक प्रक्रिया है। इसके उलट कांग्रेस एक ऐसी पार्टी बन चुकी है, जहां तथाकथित ‘परिवार’ के बिना किसी की पहचान नहीं है। कांग्रेस में राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के बावजूद नेतृत्व को बार-बार यह स्पष्ट करना पड़ता है कि पार्टी के मुखिया वही हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि वहां केवल सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा के दरबार की ही अहमियत है।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं को आज तक यह समझ नहीं आ पाया कि एक राजनीतिक दल में राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका क्या होती है, क्योंकि उन्होंने कभी स्वतंत्र नेतृत्व को फलते-फूलते देखा ही नहीं। भाजपा में संगठन सर्वोपरि है, व्यक्ति नहीं। यही कारण है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष या कार्यकारी अध्यक्ष से मुलाकात किसी विशेष कृपा का विषय नहीं, बल्कि संगठनात्मक संवाद का स्वाभाविक हिस्सा है।
डॉ. मिश्रा ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस शासनकाल की याद दिलाते हुए कहा कि जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और भूपेश बघेल मुख्यमंत्री थे, तब भी उन्हें सोनिया गांधी के दरबार तक पहुंचने की अनुमति नहीं मिल पाई थी। उस दौरान सुरक्षा बलों के साथ उनका विवाद और उससे जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हुआ था। यह घटना कांग्रेस की आंतरिक हकीकत और सत्ता में रहते हुए भी नेतृत्व तक सीमित पहुंच का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि भाजपा में ऐसी कोई स्थिति नहीं है। यहां कार्यकर्ता से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक संवाद का स्पष्ट और सम्मानजनक तंत्र मौजूद है। यही कारण है कि कांग्रेस भाजपा की संगठनात्मक मजबूती और नेतृत्व की सुलभता से घबराई हुई है।
डॉ. विजय शंकर मिश्रा ने कांग्रेस को सलाह देते हुए कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष या संगठनात्मक प्रक्रिया पर सवाल उठाने से पहले कांग्रेस को दिल्ली में अपनी हैसियत और पूछ-परख पर आत्ममंथन करना चाहिए। दूसरों पर उंगली उठाने से पहले कांग्रेस को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए कि आखिर उनके नेताओं की ‘दरबार’ में एंट्री क्यों नहीं हो पाती।





