सुदामा चरित्र से भावविभोर हुआ वृंदावन: फोगला आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा का भावपूर्ण समापन, अनिरुद्धाचार्य जी ने बच्चों को कथा से जोड़ने का दिया संदेश






वृंदावन।
त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** कोरबा श्रीधाम वृंदावन स्थित फोगला आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का आज अंतिम दिवस अत्यंत भक्तिमय एवं भावप्रवण वातावरण में संपन्न हुआ। कथा के समापन अवसर पर सुदामा चरित्र का विशेष एवं हृदयस्पर्शी वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा परिसर “जय श्रीकृष्ण” के उद्घोष से गूंज उठा।


कथा व्यास श्रीहित ललितवल्लभ नागर जी ने सुदामा–कृष्ण मैत्री का मार्मिक वर्णन करते हुए बताया कि सच्ची मित्रता, विनम्रता और निष्काम भक्ति के आगे स्वयं भगवान भी द्रवित हो जाते हैं। सुदामा जी की दरिद्रता, उनकी निष्कलंक भक्ति और श्रीकृष्ण द्वारा उन्हें अपनाने का प्रसंग सुनकर अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
अनिरुद्धाचार्य जी के आगमन से कथा स्थल पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
कथा के अंतिम दिन प्रख्यात संत एवं कथावाचक अनिरुद्धाचार्य जी महाराज के आगमन से वातावरण और भी आध्यात्मिक एवं ऊर्जावान हो गया। उनके दर्शन एवं वचनों को सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
अनिरुद्धाचार्य जी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि—
“यदि समाज को संस्कारवान बनाना है तो बच्चों को बचपन से ही श्रीमद्भागवत कथा, भजन-कीर्तन और पूजा-पाठ से जोड़ना होगा।”
उन्होंने अभिभावकों से विशेष आग्रह करते हुए कहा कि अपने बच्चों को कथा में अवश्य लाएं, उन्हें भागवत, आरती, पूजन एवं प्रसाद वितरण जैसे धार्मिक आयोजनों में सहभागी बनाएं, ताकि उनमें संस्कार, श्रद्धा और संस्कृति के बीज अंकुरित हो सकें।
जहां-जहां पूजा हो, बच्चों की उपस्थिति अनिवार्य – अनिरुद्धाचार्य जी
अनिरुद्धाचार्य जी ने कहा कि आज के आधुनिक दौर में बच्चे मोबाइल और भौतिक आकर्षणों की ओर अधिक जा रहे हैं, ऐसे में धार्मिक आयोजनों में बच्चों की सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा—
“जहां-जहां भागवत कथा में पूजा होती है, वहां बच्चों को अवश्य लाना चाहिए। यही बच्चे भविष्य के संस्कारवान नागरिक बनेंगे।”
उनके इस संदेश का श्रद्धालुओं ने करतल ध्वनि से स्वागत किया।

भक्ति, ज्ञान और संस्कार का संगम बनी भागवत कथा
कथा के समापन अवसर पर भक्तों ने भजन-कीर्तन, आरती एवं प्रसाद वितरण में भाग लिया। सुदामा चरित्र के साथ कथा का समापन भक्ति, वैराग्य और मानवता के संदेश के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने आयोजन समिति एवं कथा व्यास का आभार व्यक्त करते हुए ऐसे आयोजनों को निरंतर करते रहने की कामना की।





