August 14, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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चेक बाउंस मामले में बड़ा फैसला — ₹44.70 लाख के चेक अनादरण पर अभियुक्त को दो वर्ष का सश्रम कारावास, 25 लाख का अर्थदंड

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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****//** कोरबा, 10 मार्च 2026। चेक अनादरण (चेक बाउंस) के एक महत्वपूर्ण मामले में कोरबा की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कु. कुमुदिनी गर्ग की अदालत ने अहम निर्णय सुनाते हुए अभियुक्त संजय ओग्रे को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने अभियुक्त को परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के तहत दोषसिद्ध करते हुए दो वर्ष के सश्रम कारावास तथा ₹25,00,000 के अर्थदंड से दंडित किया है।
प्रकरण के अनुसार परिवादी छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक, शाखा भैसमा की ओर से शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी की। मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों एवं अभिलेखों के आधार पर यह स्थापित हुआ कि अभियुक्त द्वारा अपने ऋण दायित्व के निर्वहन के लिए ₹44,70,968 की राशि का चेक बैंक को जारी किया गया था।
जब उक्त चेक को बैंक में प्रस्तुत किया गया, तो वह “पर्याप्त निधि के अभाव” (Insufficient Funds) के कारण अनादरित हो गया। इसके बाद बैंक की ओर से विधि अनुसार अभियुक्त को नोटिस भी जारी किया गया, किंतु निर्धारित समयावधि के भीतर भी अभियुक्त द्वारा राशि का भुगतान नहीं किया गया।
मामले के सभी पहलुओं, दस्तावेजी साक्ष्यों तथा प्रस्तुत तर्कों का परीक्षण करने के पश्चात न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी निर्देश दिया कि अर्थदंड के रूप में वसूल की जाने वाली ₹25 लाख की राशि परिवादी बैंक को प्रतिकर (मुआवजा) के रूप में प्रदान की जाएगी।
निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए परिवादी पक्ष के अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह ने कहा कि यह फैसला न्यायपालिका की निष्पक्षता और प्रभावशीलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कड़े निर्णय आर्थिक अपराधों पर अंकुश लगाने में सहायक सिद्ध होते हैं और इससे आम नागरिकों तथा वित्तीय संस्थानों का न्यायपालिका पर विश्वास और भी मजबूत होता है।
कानूनी जानकारों के अनुसार यह निर्णय चेक अनादरण के मामलों में एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता और जिम्मेदारी अत्यंत आवश्यक है तथा कानून का उल्लंघन करने वालों को कठोर दंड का सामना करना पड़ सकता है।

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