February 12, 2026

त्रिनेत्र टाईम्स

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शरद पूर्णिमा की रात्रि में कोरबा में छलका आस्था और उल्लास का संगम — भक्ति, परंपरा और स्वास्थ्य से जुड़ी रही पूनम की रात की रोचक कहानियां

कोरबा।आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि पर आई शरद पूर्णिमा की पावन रात ने कोरबा जिले में श्रद्धा, परंपरा और उल्लास का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। सोमवार 6 अक्टूबर की रात को जैसे ही आकाश में शरद पूर्णिमा का चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ उदित हुआ, वैसे ही नगर और ग्रामीण अंचल के मंदिरों, घरों और आश्रमों में भक्ति और रौनक का माहौल बन गया। शरद पूर्णिमा की रात को वर्ष की सबसे पवित्र और औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण रात माना जाता है, क्योंकि इस दिन चंद्रमा की किरणों में अमृत तत्व का संचार होता है।
✨ रात्रि में मंदिरों में भजन-कीर्तन और अखंड आरती का आयोजन
कोरबा शहर स्थित श्री सप्तदेव मंदिर, राधा कृष्ण मंदिर, माता महामाया मंदिर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के प्राचीन मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। मंदिरों को फूलों और रंगीन रोशनी से सजाया गया था। देर रात तक भजन-कीर्तन, गरबा नृत्य और आरती के स्वर गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने पारंपरिक वस्त्रों में सज-धज कर पूजा-अर्चना में भाग लिया और भगवान श्रीकृष्ण, माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की आराधना की।
🥛 खीर का विशेष महत्व — चांदनी में रखकर किया गया सेवन
शरद पूर्णिमा की रात को खीर बनाकर खुले आसमान में चांदनी के नीचे रखा जाता है। मान्यता है कि चंद्रमा की किरणों में इस दिन औषधीय गुण अधिक मात्रा में होते हैं, जिससे खीर में अमृत तत्व का संचार होता है। कोरबा के कई परिवारों में परंपरा के अनुसार चांदी या मिट्टी के बर्तनों में खीर बनाकर छतों और आंगनों में रखा गया और मध्यरात्रि में परिवारजनों एवं श्रद्धालुओं ने प्रसाद स्वरूप उसका सेवन किया।
👪 परिवार और समाज में एकता का अवसर बनी पूर्णिमा की रात
शरद पूर्णिमा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि परिवार और समाज में एकता और उल्लास का प्रतीक भी है। लोग एक-दूसरे के घर जाकर खीर प्रसाद ग्रहण करते हैं, एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और देर रात तक हंसी-खुशी का माहौल बना रहता है। शहर के कई सांस्कृतिक संगठनों ने भी भक्ति संध्या और सामूहिक चांदनी खीर वितरण का आयोजन किया, जिसमें सभी आयु वर्ग के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
🪄 कथाओं और मान्यताओं से भरी है शरद पूर्णिमा की रात
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में रासलीला रचकर गोपियों को आनंद और भक्ति में लीन किया था। ऐसा भी माना जाता है कि इस रात लक्ष्मी माता पृथ्वी पर विचरण करती हैं और जिन घरों में स्वच्छता, भक्ति और उल्लास होता है, वहां धन-धान्य की वृद्धि होती है। इसलिए लोग घरों को विशेष रूप से सजाते हैं, दीप जलाते हैं और देर रात तक पूजा-पाठ करते हैं।
🌿 स्वास्थ्य और विज्ञान से भी जुड़ा है पर्व
आयुर्वेद के अनुसार, शरद ऋतु में चंद्रमा की किरणों में विशेष शीतलता और औषधीय प्रभाव होता है। इस रात खुले आसमान में कुछ समय बैठना और चांदनी का सेवन शरीर के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। चिकित्सक भी इस परंपरा को स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से सकारात्मक मानते हैं।
✨ आस्था, आनंद और परंपरा से जगमगाई कोरबा की रात
इस प्रकार शरद पूर्णिमा की रात को कोरबा नगर और ग्रामीण इलाकों में भक्ति, परंपरा, पारिवारिक मेल-मिलाप और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का सुंदर संगम देखने को मिला। देर रात तक लोग मंदिरों और घरों में पूजा, भजन, आरती और खीर वितरण में व्यस्त रहे। पूर्णिमा के शीतल प्रकाश ने वातावरण को अद्भुत पवित्रता और शांति से भर दिया।
👉 शरद पूर्णिमा का यह पर्व लोगों के लिए न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि सामाजिक सौहार्द और स्वास्थ्यवर्धक परंपरा का उत्सव भी बन गया। 🌕

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