‘प्रोजेक्ट उन्नति’ से सशक्त हुईं बालकोनगर की महिलाएँ — आत्मनिर्भरता और सामाजिक बदलाव की नई मिसाल गढ़ रहीं नारी शक्तियाँ


कोरबा (बालकोनगर)। नवरात्रि पर्व के पावन अवसर पर जब सम्पूर्ण देश में शक्ति और नारीत्व की आराधना हो रही है, ठीक उसी समय बालको नगर की महिलाएँ अपनी मेहनत, हुनर और आत्मविश्वास से सशक्तिकरण की एक नई गाथा लिख रही हैं। भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) की पहल ‘प्रोजेक्ट उन्नति’ के माध्यम से स्थानीय महिलाओं ने आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में उल्लेखनीय कदम बढ़ाए हैं। उनके जीवन में आए इस परिवर्तन की कहानियाँ सामाजिक बदलाव की नई संभावनाओं को उजागर कर रही हैं।

शांतिनगर निवासी श्रीमती पूनम सिंह की कहानी प्रेरणा का स्रोत है। वह बताती हैं, “मेरे पास एक सपना था, लेकिन कभी नहीं सोचा था कि मेरी कला मुझे आत्मनिर्भर बना सकती है। आज मैं अपना व्यवसाय चला रही हूँ, परिवार के निर्णयों में सक्रिय रूप से भाग लेती हूँ और अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हूँ।”
पूनम ने घर पर सजावटी वस्तुएँ बनाने के शौक को ‘डेकोरट्टी’ नामक सूक्ष्म उद्यम में परिवर्तित किया। उन्होंने उन्नति परियोजना से जुड़कर उत्पाद का मूल्य निर्धारण, ग्राहक संवाद और सोशल मीडिया प्रचार जैसे कौशल सीखे। आज त्योहारों में उनके बनाए उत्पाद न केवल लोगों के घरों की शोभा बढ़ा रहे हैं, बल्कि उनके आत्मनिर्भर जीवन की पहचान बन चुके हैं।
इसी प्रकार श्रीमती रथ बाई की ‘छत्तीसा’ नामक फूड-आधारित इकाई आज स्थानीय बाज़ार में लोकप्रिय है। वह कहती हैं, “शुरुआत में मुझे बाहर जाकर उत्पाद बेचने का अनुभव नहीं था। उन्नति ने मुझे ऑर्डर प्रबंधन, उत्पाद प्रचार और ग्राहकों से जुड़ना सिखाया। दोबारा मिलने वाले ऑर्डर ने मेरे उद्यम को नई पहचान दी।”
श्रीमती मालती गोस्वामी ने बताया कि उन्नति परियोजना के तहत मिले वित्तीय प्रशिक्षण ने उनके आत्मविश्वास को गहरा किया। “अब मैं अपने व्यवसाय का लेखा-जोखा खुद रखती हूँ, लाभ-हानि का आकलन करती हूँ और भविष्य की योजना बनाती हूँ। पहले मैं दूसरों से सलाह लेती थी, आज महिलाएँ मुझसे मार्गदर्शन लेती हैं,” उन्होंने गर्व से कहा।
सबसे उल्लेखनीय बदलाव महिलाओं के सामाजिक आत्मविश्वास में दिखता है। जो महिलाएँ पहले सार्वजनिक मंचों पर बोलने में संकोच करती थीं, आज वे आत्मविश्वास से अपने स्वयं सहायता समूहों का नेतृत्व कर रही हैं। श्रीमती सरला यादव कहती हैं, “हमारी बैठकों में अब केवल बचत योजनाओं की बात नहीं होती, हम सपनों को साझा करते हैं, एक-दूसरे का उत्साह बढ़ाते हैं और मिलकर आगे बढ़ने की योजनाएँ बनाते हैं। हमने सीखा है कि हमारी आवाज़ मायने रखती है।”
इन कहानियों से स्पष्ट है कि महिला सशक्तिकरण हमेशा बड़े कदमों से नहीं आता, बल्कि छोटे-छोटे निरंतर प्रयासों का परिणाम होता है। प्रत्येक कौशल, प्रत्येक निर्णय और प्रत्येक उद्यम महिलाओं की स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता को एक नई दिशा दे रहा है।
इस नवरात्रि, जब समाज माँ शक्ति की आराधना में लीन है, तब पूनम, रथ, मालती, सरला और सैकड़ों अन्य महिलाओं की यह प्रेरक यात्रा साबित करती है कि जब सपने अवसर से मिलते हैं, तो परिवर्तन अवश्य होता है। वे केवल उत्पाद या व्यवसाय नहीं बना रहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की वह विरासत गढ़ रही हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।
👉 ‘प्रोजेक्ट उन्नति’ न केवल एक विकासात्मक पहल है, बल्कि यह महिलाओं की आर्थिक, सामाजिक और मानसिक उन्नति की सशक्त गाथा बन चुकी है। बालकोनगर की यह पहल पूरे प्रदेश के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत कर रही

