असाधारण स्मरण शक्ति और बहुमुखी प्रतिभा के धनी, पद्मविभूषण से सम्मानित जगद्गुरु रामभद्राचार्य से मिलने का मिला सौभाग्य


त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ जगद्गुरु रामभद्राचार्य जन्म से ही नेत्रहीन होने के बावजूद आज एक प्रख्यात आध्यात्मिक नेता, संस्कृत विद्वान, कवि, लेखक, वक्ता और दार्शनिक के रूप में पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। 22 भाषाओं के ज्ञाता और अब तक 80 से अधिक ग्रंथों की रचना कर चुके जगद्गुरु को तुलसी पीठ के जगद्गुरु के रूप में सम्मानित किया गया है।
भारत सरकार ने उनकी अद्वितीय प्रतिभा और समाजसेवा के लिए वर्ष 2015 में उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मविभूषण से अलंकृत किया। साथ ही वे विश्व का पहला विकलांग विश्वविद्यालय चलाने वाले संस्थापक भी हैं, जो शिक्षा और संस्कृत परंपरा के संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उनकी असाधारण स्मरण शक्ति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मात्र 5 वर्ष की आयु में उन्होंने संपूर्ण भगवद्गीता और 7 वर्ष की आयु में रामचरितमानस कंठस्थ कर ली थी।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य स्वामी भारतीय हिन्दू आध्यात्मिक नेता, शिक्षाविद, बहुभाषी, कवि, लेखक, टीकाकार, दार्शनिक, संगीतकार, गायक, नाटककार और कथावाचक हैं।
ऐसे महान विद्वान और बहुमुखी प्रतिभा के धनी जगद्गुरु रामभद्राचार्य से मिलने का अवसर मिलना वास्तव में एक सौभाग्य का विषय है। 🙏

