बालको मेडिकल सेंटर का छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव : रोकथाम, शोध और बहु-विशेषज्ञ सहयोग पर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मंथन


त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा ****/ रायपुर, 20 सितम्बर 2025। वेदांता मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन की इकाई और मध्य भारत में कैंसर उपचार के क्षेत्र में अग्रणी बालको मेडिकल सेंटर (बीएमसी) ने अपने तीसरे ‘छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव’ का सफल आयोजन किया। इस अवसर पर 300 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कैंसर विशेषज्ञों तथा 1,200 से ज्यादा प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें ऑन्कोलॉजिस्ट, जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और शोधकर्ता शामिल थे। कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य कैंसर उपचार को सुलभ बनाना, मरीजों के बेहतर परिणाम सुनिश्चित करना और अनुसंधान को नई दिशा देना रहा।
इस वर्ष का थीम “ड्राइविंग कॉमन-सेंस ऑन्कोलॉजी – मल्टीडिसिप्लिनरी मैनेजमेंट ऑफ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल, जेनिटोयूरिनरी एंड लंग कैंसर” रखा गया। इसका लक्ष्य मरीजों के उपचार में बहु-विशेषज्ञ सहयोग के महत्व को बढ़ावा देना और टीम आधारित प्रबंधन को नई गति देना था। ई-कैंसर, टाटा मेमोरियल सेंटर और नेशनल कैंसर ग्रिड के सहयोग से आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में 20 से अधिक विशेषज्ञ पैनल चर्चाएँ हुईं।

कॉन्क्लेव में कई विशेष और नवाचारी कार्यशालाएँ आयोजित की गईं, जिनमें कार्ट-टी सेल अफेरेसिस, सिर एवं गर्दन के कैंसर पर लाइव सर्जरी डेमोंस्ट्रेशन, मिनी-अकॉर्ड रिसर्च वर्कशॉप, जीवन की अंतिम अवस्था में मरीजों और परिजनों से संवाद की कला पर प्रशिक्षण, तथा एसबीआरटी (स्टेरियोटैक्टिक बॉडी रेडियोथेरेपी) पर हैंड्स-ऑन कॉन्टूरिंग वर्कशॉप शामिल रही। इसके अतिरिक्त, वीमेन फॉर ऑन्कोलॉजी (W4O इंडिया) नेटवर्क मीटिंग और सामुदायिक स्तर पर कैंसर रोकथाम को सशक्त बनाने हेतु विशेष कैंसर प्रिवेंशन वर्कशॉप भी आयोजित हुई।
प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए वेदांता मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन (वीएमआरएफ) की निदेशक श्रीमती ज्योति अग्रवाल ने कहा—
“विश्वस्तरीय कैंसर विशेषज्ञों की मेजबानी करना हमारे लिए सम्मान की बात है। कैंसर की रोकथाम ही सबसे सशक्त इलाज है। वीएमआरएफ का मिशन है कि समुदाय को समय पर जांच एवं उपचार के लिए ज्ञान, साधन और स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँ। यह कॉन्क्लेव हमारे इस संकल्प को दोहराता है कि हम केवल इलाज ही नहीं, बल्कि रोकथाम को भी प्राथमिकता दें, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ भविष्य बनाया जा सके।”
डॉ. शैलेश श्रीखंडे, डिप्टी डायरेक्टर, टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल एवं हेड, कैंसर सर्जरी ने कहा—
“भारत में कैंसर देखभाल को रोकथाम से लेकर आधुनिक इलाज तक पूरी श्रृंखला को शामिल करना चाहिए। यह कॉन्क्लेव इस बात का उदाहरण है कि जब वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित रोकथाम रणनीतियाँ बहुविषयक विशेषज्ञता से जुड़ती हैं, तो कैंसर के मामलों और मृत्यु दर दोनों को कम किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में वैज्ञानिक मूल्यों और नैतिकता को बनाए रखना बेहद आवश्यक है।”
डॉ. भावना सिरोही, चिकित्सा निदेशक, बीएमसी ने कहा—
“पिछले कुछ वर्षों में कैंसर के मामलों में तेज़ी से वृद्धि बेहद चिंता का विषय है। इसलिए जागरूकता और रोकथाम को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। सही उपायों और समय पर उपचार से कैंसर रोके जा सकते हैं, जो कि किफायती और उपचार योग्य भी हैं। हमारा लक्ष्य है कि रोकथाम को कैंसर देखभाल में सबसे सुलभ और न्यायसंगत रूप बनाया जाए।”
डॉ. दिवाकर पांडे, कंसल्टेंट सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, बीएमसी ने कहा—

“कैंसर देखभाल में स्थानीय स्तर पर किए गए शोध का महत्व अत्यधिक है। यह देखकर खुशी होती है कि युवा ऑन्कोलॉजिस्ट ऐसे शोध कर रहे हैं, जो उनके मरीजों की आवश्यकताओं पर केंद्रित हैं। इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में किफायती और सांस्कृतिक रूप से उपयुक्त रोकथाम रणनीतियाँ विकसित होंगी।”
इस तीसरे संस्करण ने बीएमसी की इस प्रतिबद्धता को और मजबूत किया कि मध्य भारत में एक समग्र कैंसर इकोसिस्टम विकसित किया जाए, जिसमें उत्कृष्ट इलाज, शोध, रोकथाम, जनजागरूकता और शिक्षा को एक साथ जोड़ा जाए। कार्यक्रम का समापन इस आह्वान के साथ हुआ कि कैंसर रोकथाम को सार्वजनिक स्वास्थ्य की सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया जाए, ताकि आने वाले दशकों में भारत में कैंसर का बोझ कम किया जा सके।

