एनएचएम संविदा कर्मचारियों की हड़ताल ने पूरे किए 30 दिन : सरकार ने 794 कर्मचारियों को किया बर्खास्त, अब 10 हजार कर्मचारी करेंगे जेल भरो आंदोलन


त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा **/ कोरबा। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) संविदा कर्मचारियों की हड़ताल को आज 1 महीना पूरा हो गया है। प्रदेश भर में हजारों कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर लगातार आंदोलनरत हैं। सरकार ने हड़ताल खत्म करने के लिए 16 सितंबर तक अंतिम अल्टीमेटम दिया था, लेकिन कर्मचारी अपनी मांगों पर अडिग रहे। इसके बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए अब तक कुल 794 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं।
सबसे बड़ी कार्रवाई सूरजपुर जिले में की गई, जहां 594 कर्मचारियों को एक साथ बर्खास्त कर दिया गया। इसके अलावा बलौदाबाजार जिले में 160 और कोरबा जिले में 21 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया। इससे पहले 3 सितंबर को स्वास्थ्य विभाग ने 25 कर्मचारियों को बर्खास्त किया था, जिनमें संगठन के प्रदेश संरक्षक हेमंत सिन्हा और महासचिव कौशलेश तिवारी भी शामिल थे।
जेल भरो आंदोलन का ऐलान
सरकारी कार्रवाई के बावजूद कर्मचारियों ने आंदोलन और तेज करने का फैसला किया है। एनएचएम कर्मचारी संगठन ने घोषणा की है कि संभाग स्तर पर “जेल भरो आंदोलन” किया जाएगा। राजधानी रायपुर के तूता धरना स्थल पर रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर संभाग से करीब 10 हजार कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल होंगे।
10 सूत्रीय मांगों पर टकराव
एनएचएम कर्मचारी संगठन अपनी 10 सूत्रीय मांगों पर डटा हुआ है। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार ने इनमें से 5 मांगों पर मौखिक सहमति दी है, लेकिन शेष 5 पर कोई लिखित आश्वासन नहीं दिया गया। संगठन का कहना है कि “मौखिक भरोसे” से अब काम नहीं चलेगा, सरकार को सभी मांगों पर लिखित आदेश जारी करना होगा।
स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर
लगातार चल रही हड़ताल का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है। प्रदेश के कई शासकीय अस्पतालों में ताले लटके हुए हैं। ऑपरेशन थिएटर (ओटी) और प्रसव सेवाएं पूरी तरह ठप हैं। संस्थागत प्रसव, पैथोलॉजी जांच, एक्स-रे, सोनोग्राफी और टीकाकरण जैसी बुनियादी सेवाएं प्रभावित हो गई हैं। मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, खासकर रात्रिकालीन प्रसव और आपातकालीन ऑपरेशनों में गंभीर स्थिति बन गई है।
स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन ने नियमित कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं और उन्हें तुरंत ड्यूटी पर हाज़िर होने का आदेश दिया है। बावजूद इसके स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित बनी हुई हैं।

