August 15, 2026

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आश्विन कृष्ण एकादशी पर पवित्र इंदिरा एकादशी व्रत 17 सितंबर 2025 को : पुण्यकथा एवं पारायण विधि का विस्तृत विवरण

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त्रिनेत्र टाइम्स कोरबा***, 16 सितंबर 2025 –
आश्विन कृष्ण एकादशी का पवित्र पर्व “इंदिरा एकादशी” आगामी दिनांक 17 सितंबर 2025, बुधवार को मनाया जाएगा। यह एकादशी केवल पवित्र व्रत ही नहीं अपितु पितरों को अधोगति से मुक्ति दिलाने वाली तथा पापों का नाश करने वाली मानी जाती है। नाड़ीवैद्य पंडित डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा के अनुसार, इस एकादशी का महत्व अत्यंत महान है। इंदिरा एकादशी के व्रत का पालन विधिपूर्वक करने से यमलोक में फंसे पितरों की मुक्ति संभव होती है और व्रती को पापों से मुक्ति एवं सुखमय जीवन की प्राप्ति होती है।
⏰ व्रत का कालक्रम –
प्रारंभ: 17 सितंबर 2025, बुधवार, सुबह 12:21 बजे (AM)
समाप्ति: 17 सितंबर 2025, बुधवार, रात 11:39 बजे
पारण काल: 18 सितंबर 2025, गुरुवार प्रातः 06:07 से 08:34 बजे के मध्य किया जाना अनिवार्य।
📖 इंदिरा एकादशी व्रत कथा का सारांश –
सतयुग में महिष्मति नगरी के इंद्रसेन नामक धर्मपरायण राजा ने संत महर्षि नारद से प्रेरणा लेकर यह पवित्र व्रत विधिपूर्वक संपन्न किया था। नारद मुनि ने राजा को बताया कि इस व्रत का पालन करने से ना केवल पितरों को स्वर्ग की प्राप्ति होती है, बल्कि व्रती को भी पापों से मुक्ति मिलती है।
व्रत विधि के अनुसार, व्रती को निम्नलिखित क्रियाएँ करनी चाहिए –
आश्विन माह की कृष्ण पक्ष दशमी तिथि को श्रद्धापूर्वक स्नान आदि करके एक बार भोजन करें।
एकादशी तिथि के प्रातः स्नान कर, पितरों का श्राद्ध विधिपूर्वक करें।
शालिग्राम की पूजा कर योग्य ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
सम्पूर्ण दिन का निर्जला व्रत पालन करें एवं भगवान विष्णु के निकट जागरण करें।
द्वादशी तिथि प्रातःकाल पर ब्राह्मणों को भोजन कराकर पारण करें।
🌼 पंडित शर्मा ने बताया कि व्रत कथा के अध्ययन मात्र से ही वायपेय यज्ञ का फल प्राप्त होता है और पापों का नाश होता है।
इस पुण्य एकादशी व्रत के पालन से मनुष्य समस्त भोगों का अनुभव करते हुए भी बैकुंठ धाम को प्राप्त हो सकता है।
🔔 सभी भक्तजन 17 सितंबर को विधिपूर्वक व्रत का पालन करें एवं पारायण काल का विशेष ध्यान रखें ताकि इस एकादशी का सम्पूर्ण लाभ प्राप्त हो सके।
।।ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।।

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